राजनीति

संजय राउत का नया दावा: मुंबई महापौर चुनाव में सिर्फ 6 सीटों का खेल, ओवैसी की भूमिका पर सस्पेंस

संजय राउत का नया दावा: मुंबई महापौर चुनाव में सिर्फ 6 सीटों का खेल, ओवैसी की भूमिका पर सस्पेंस

मुंबई: बीएमसी चुनाव 2026 के नतीजों के बाद महानगरपालिका में महापौर पद को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। महायुति गठबंधन (बीजेपी + शिंदे गुट शिवसेना) के पास स्पष्ट बहुमत दिख रहा है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा किया है कि विपक्ष महज 6 सीटों से बहुमत से दूर है और खेल अभी बाकी है।

संजय राउत ने कहा, “हमारे पास उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन, कांग्रेस, एमएनएस और अन्य सहयोगियों के साथ कुल 108 सीटें हैं। महापौर चुनने के लिए 114 सीटों की जरूरत है, यानी सिर्फ 6 सीटों का अंतर बचा है। इंतजार करिए, देखते रहिए।” उन्होंने यह भी तंज कसा कि शिंदे गुट के पार्षद होटलों में “छिपाए” जा रहे हैं, जबकि उनके पार्षद घर पर सामान्य जीवन जी रहे हैं।

क्यों है 6 सीटों का दांव खास?

बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं, महापौर चुनाव के लिए बहुमत का आंकड़ा 114 है।

महायुति को बीजेपी की 89 + शिंदे शिवसेना की 29 = 118 सीटें मिलीं, जो बहुमत से ऊपर है।

लेकिन विपक्षी दलों की गिनती: शिवसेना (यूबीटी) – 65, कांग्रेस – 24, एमएनएस – 6, समाजवादी पार्टी – 2, अन्य छोटे दल।

राउत का गणित: इन सबको मिलाकर 108 तक पहुंच रहा है। अब बाकी 6 सीटें निर्णायक हो सकती हैं।

यहां ओवैसी फैक्टर सबसे बड़ा ट्विस्ट है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने मुंबई में 8 सीटें जीती हैं। ये 8 सीटें विपक्ष के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। अगर AIMIM विपक्ष (उद्धव गुट) का साथ देती है, तो 108 + 8 = 116 हो जाएंगी, जो बहुमत से ज्यादा है। ऐसे में महायुति का दावा कमजोर पड़ सकता है और मेयर पद पर बड़ा उलटफेर संभव है।

हालांकि, AIMIM ने अभी तक किसी गठबंधन की घोषणा नहीं की है। ओवैसी ने महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन मुंबई में उनकी रणनीति क्या होगी, यह देखना बाकी है। कुछ रिपोर्ट्स में संकेत हैं कि AIMIM महायुति या विपक्ष दोनों से बातचीत कर सकती है, लेकिन अभी कोई पक्का फैसला नहीं हुआ।

महायुति की ओर से बीजेपी और शिंदे गुट दोनों मेयर पद पर दावा कर रहे हैं, जबकि उद्धव गुट इसे “खेल” बताकर सस्पेंस बनाए रखना चाहता है। 22 जनवरी तक मेयर चुनाव की संभावना है, लेकिन पार्षदों को होटलों में रखने की खबरों से राजनीतिक ड्रामा और गहरा गया है।

क्या ओवैसी का दांव विपक्ष को महापौर दिला पाएगा? या महायुति का बहुमत बरकरार रहेगा? अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

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