उत्तराखंड में नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज: सीएम आवास कूच, पुलिस ने रोका – सामूहिक मुंडन टाला, DG हेल्थ से वार्ता के बाद धरना स्थल लौटे!
उत्तराखंड में नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज: सीएम आवास कूच, पुलिस ने रोका – सामूहिक मुंडन टाला, DG हेल्थ से वार्ता के बाद धरना स्थल लौटे!
देहरादून में नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों का गुस्सा 19 जनवरी 2026 को फूट पड़ा। विगत 45 दिनों से एकता विहार स्थित धरना स्थल पर आंदोलनरत अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया, लेकिन पुलिस ने न्यू कैंट रोड पर हाथीबड़कला में बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद अभ्यर्थी सड़क पर ही धरना पर बैठ गए और वहां सभा आयोजित की।
मुख्य मांगें और विवाद:
वर्षवार भर्ती की मांग: मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि पहले नर्सिंग भर्ती वर्षवार (year-wise/merit-based) होती थी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में यह नहीं हो रहा, जो उनके हितों के खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि लिखित भर्ती विज्ञप्ति तत्काल निरस्त हो और भर्ती वर्षवार कराई जाए।
अन्य मांगें: राज्य में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी (2500+ पद खाली) से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में उत्तराखंड मूल निवासियों को प्राथमिकता मिले, बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों पर रोक लगे, और ओवर-एज अभ्यर्थियों को छूट दी जाए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर: मंच का दावा है कि कमी से अस्पतालों में सेवाएं प्रभावित हैं, और सरकार को अभ्यर्थियों के भविष्य व राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा।
घटनाक्रम:
अभ्यर्थियों ने आज सामूहिक मुंडन कराने का ऐलान किया था, लेकिन उत्तराखंड स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. सुनीता टम्टा ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया, जिसके बाद मुंडन कार्यक्रम टाल दिया गया।
वार्ता के बाद सभी अभ्यर्थी एकता विहार धरना स्थल लौट गए, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी।
यह 40 दिनों में दूसरी बार सीएम आवास कूच था। इससे पहले 8 दिसंबर 2025 को सचिवालय कूच के दौरान पुलिस से झड़प हुई थी, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी ने महिला अभ्यर्थी को थप्पड़ मारा था – जिसका कई संगठनों ने विरोध किया था।
पृष्ठभूमि:
उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती लंबे समय से विवादास्पद है। UKMSSB द्वारा हाल ही में निकली भर्तियों में परीक्षा-आधारित प्रक्रिया अपनाई गई है, जबकि अभ्यर्थी वर्षवार मेरिट पर जोर दे रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, और यह आंदोलन इसी से जुड़ा है।
आंदोलनकारी अब वार्ता के नतीजों पर नजर रखे हुए हैं। क्या सरकार उनकी मांगें मानेगी या आंदोलन और तेज होगा? उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका असर पड़ सकता है। अपडेट्स का इंतजार!
