राजनीति

मुंबई मेयर चुनाव में बड़ा ट्विस्ट: शिवसेना (शिंदे गुट) ने पहले साल के लिए मेयर पद मांगा, भाजपा ने पार्षदों को दिया सख्त आदेश – ‘शहर न छोड़ें’!

मुंबई मेयर चुनाव में बड़ा ट्विस्ट: शिवसेना (शिंदे गुट) ने पहले साल के लिए मेयर पद मांगा, भाजपा ने पार्षदों को दिया सख्त आदेश – ‘शहर न छोड़ें’!

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर चुनाव में महायुति गठबंधन (BJP + शिवसेना शिंदे गुट) के अंदर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। BMC चुनाव में गठबंधन ने 118 सीटें जीतीं (BJP 89 + शिवसेना 29), जो बहुमत (114) से ज्यादा हैं। लेकिन मेयर पद को लेकर अब बड़ा विवाद – एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने पहले साल (या कम से कम ढाई साल) के लिए मेयर पद की मांग ठोक दी है।

मुख्य ट्विस्ट और डिटेल्स:

शिवसेना का दावा: पार्टी ने बाल ठाकरे की 100वीं जयंती (2026 में) का हवाला देते हुए कहा कि पहले साल मेयर शिवसेना से होना चाहिए। उसके बाद बाकी 4 साल BJP संभाल सकती है। पहले पार्टी ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर अड़ी थी, लेकिन अब पहले साल पर फोकस।

BJP का रुख: पार्टी ने अपने 89 नवनिर्वाचित पार्षदों को सख्त निर्देश दिए हैं – अगले 10 दिन तक मुंबई न छोड़ें। कोई भी बाहर न जाए, ताकि कोई हॉर्स-ट्रेडिंग या दलबदल न हो। BJP का कहना है कि मेयर पद पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए, क्योंकि वे सबसे बड़ी पार्टी हैं।

शिंदे गुट की तैयारी: एकनाथ शिंदे ने अपने 29 पार्षदों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड होटल में शिफ्ट कर दिया है। वहां ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग चल रही है। पार्टी का कहना है कि यह “रिफ्रेशमेंट” और “गाइडेंस” के लिए है, लेकिन विपक्ष इसे “कैद” बता रहा है।

उद्धव गुट का एंगल: संजय राउत ने कहा – “टाइगर अभी जिंदा है! शिंदे खुद BJP का मेयर नहीं चाहते, इसलिए पार्षदों को होटल में कैद किया है।” उद्धव ठाकरे ने भी दावा किया कि अगर “देवा” चाहेंगे तो उनका मेयर भी बन सकता है।

क्या होगा आगे?

BMC में मेयर का चुनाव 227 पार्षदों द्वारा होता है। मेयर का कार्यकाल 2.5 साल का होता है, इसलिए 5 साल में दो बार चुनाव।

अगर समझौता नहीं हुआ तो लॉटरी या वोटिंग से फैसला हो सकता है, लेकिन गठबंधन में टूट का खतरा नहीं।

मेयर पद पर मुंबई का बजट (₹50,000 करोड़+) और विकास का नियंत्रण होता है, इसलिए यह लड़ाई सियासी प्रतिष्ठा की भी है।

संभावित तारीख: जनवरी अंत या फरवरी 2026 में मेयर चुनाव।

यह ट्विस्ट महायुति की एकता पर सवाल उठा रहा है। BJP सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद शिवसेना के बिना मेयर नहीं बना सकती, जबकि शिंदे गुट बाल ठाकरे की विरासत का दावा कर रहा है। क्या समझौता होगा या और ड्रामा? मुंबई की नजरें टिकी हैं!

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