‘पापा मुझे बचा लो…’ बेबस पिता और ठंड में सोता सिस्टम: नोएडा हादसे की दो दिल तोड़ देने वाली आपबीतियां!
‘पापा मुझे बचा लो…’ बेबस पिता और ठंड में सोता सिस्टम: नोएडा हादसे की दो दिल तोड़ देने वाली आपबीतियां!
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच नोएडा (ग्रेटर नोएडा, सेक्टर 150) में 16 जनवरी 2026 की आधी रात को एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार निर्माणाधीन मॉल के पानी से भरे 20 फीट गहरे बेसमेंट/गड्ढे में गिर गई। घने कोहरे की वजह से रोड पर डायवर्जन नहीं था, और युवराज की कार सीधे पानी में जा गिरी।
पहली आपबीती: बेबस पिता का दर्द – ‘पापा मुझे बचा लो’ की गुहार 80-90 मिनट तक!
युवराज ने जैसे-तैसे कार की छत पर चढ़कर फोन उठाया और पिता राजकुमार मेहता को कॉल किया।
रोते हुए कहा: “पापा, मैं नाले/गड्ढे में गिर गया हूं… डूब रहा हूं… मुझे बचा लो… मुझे अभी नहीं मरना है… पापा मुझे बचा लो!”
पिता घने कोहरे और ठंड में दौड़कर मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को कॉल किया, पुलिस आई, लेकिन उनके पास गोताखोर या क्रेन जैसी सुविधाएं नहीं थीं।
युवराज मोबाइल की टॉर्च जलाकर 20-25 मीटर दूर से बचाओ-बचाओ चिल्लाता रहा। पिता बार-बार मिन्नत करता रहा, लेकिन सिस्टम सोया हुआ था।
फायर ब्रिगेड और SDRF पहुंची, लेकिन कर्मचारियों ने कहा: “ठंडा पानी है, सरिया है… हम अंदर नहीं जाएंगे।”
लगभग 80-90 मिनट तक गुहार लगाने के बाद युवराज पानी में समा गया। पिता ने मीडिया से कहा: “मैंने हर संभव कोशिश की… भागता रहा मदद मांगने… लेकिन कोई नहीं आया। मेरे सामने ही बेटा डूब गया।”
दूसरी आपबीती: ठंडे पानी में कूद पड़े डिलिवरी बॉय की बहादुरी!
फ्लिपकार्ट/स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले डिलिवरी बॉय मोनिंदर (या स्थानीय रिपोर्ट्स में नाम अलग) मौके पर पहुंचा।
उसने बिना सोचे-समझे ठंडे पानी में छलांग लगा दी और युवराज को बचाने की कोशिश की।
लेकिन अंधेरा, ठंड और सरिया की वजह से वह भी मुश्किल से बाहर आया। उसने कहा: “मैंने कोशिश की… लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने सब बर्बाद कर दिया।”
कई रिपोर्ट्स में इसे “ठंड में सोता सिस्टम” कहा गया – पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF के पास रिसोर्स थे, लेकिन ठंड और खतरे के बहाने कोई एक्शन नहीं लिया।
हादसे के बाद क्या हुआ?
युवराज की मौत डूबने से हुई। पोस्टमॉर्टम में कन्फर्म।
पिता ने सिस्टम की लापरवाही पर सवाल उठाए – निर्माण साइट पर कोई साइनेज/बैरियर नहीं, घने कोहरे में डायवर्जन नहीं।
पुलिस ने मामला दर्ज किया, जांच जारी। NDRF/SDRF की भूमिका पर सवाल उठे।
सोशल मीडिया पर वीडियो और ऑडियो क्लिप्स वायरल – लोग रो रहे हैं, सिस्टम को कोस रहे हैं।
यह घटना उत्तर भारत की भीषण ठंड, कोहरे और इमरजेंसी सिस्टम की कमियों को उजागर कर रही है। एक बेटे की आखिरी गुहार और एक पिता की बेबसी… दिल टूट जाता है। क्या ऐसे हादसों को रोकने के लिए अब जागेंगे हम?
