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एआर रहमान के सपोर्ट में बेटियां खड़ी: ‘असहमत हों, लेकिन अपमान न करें’ – विवाद के बीच परिवार का मजबूत साथ!

एआर रहमान के सपोर्ट में बेटियां खड़ी: ‘असहमत हों, लेकिन अपमान न करें’ – विवाद के बीच परिवार का मजबूत साथ!

ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के हालिया विवादित बयानों पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जहां उन्हें बॉलीवुड में “सांप्रदायिक भेदभाव” और फिल्म ‘छावा’ को “बांटने वाली” बताने पर ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, पहली बार उनकी बेटियां खतीजा रहमान और रहीमा रहमान ने चुप्पी तोड़ी और पिता के पक्ष में मजबूती से खड़ी हो गईं।

क्या हुआ विवाद?

रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा कि पिछले 8 सालों में बॉलीवुड में उन्हें पहले जितना काम नहीं मिला, और इसका एक कारण “सांप्रदायिक सोच” या पावर शिफ्ट हो सकता है। उन्होंने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ (छत्रपति संभाजी महाराज पर आधारित) को “विभाजनकारी” बताया।

इस पर सोशल मीडिया पर भारी बवाल मचा – कुछ ने उन्हें “देश के लिए शर्म” कहा, उनकी आस्था पर सवाल उठाए, और पुराने कामों का मजाक उड़ाया। कई ने इसे “विक्टिम कार्ड” बताया।

रहमान ने बाद में इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर सफाई दी: “मेरा इरादा किसी का दिल दुखाना नहीं था। संगीत मेरे लिए संस्कृतियों का जश्न है, और मैं भारतीय होने पर गर्व करता हूं।”

बेटियों का सपोर्ट कैसे आया?

मलयालम म्यूजिक कंपोजर कैलाश मेनन ने इंस्टाग्राम पर लंबा नोट लिखा, टाइटल: “Disagree, don’t disgrace” (असहमत हों, अपमान न करें)।

उन्होंने लिखा: “रहमान ने अपनी फीलिंग्स शेयर कीं, यह उनका अधिकार है। असहमत होना ठीक है, लेकिन अपमान, चरित्र हत्या, आस्था पर हमला या उनकी उपलब्धियों को नकारना ‘हेट स्पीच’ है। वे भारत को दुनिया तक ले जाने वाले कलाकार हैं – उनकी दशकों की मेहनत एक बयान से खत्म नहीं होती।”

खतीजा और रहीमा ने इस पोस्ट को इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। खतीजा ने कैलाश के पोस्ट पर क्लैपिंग 👏, फायर 🔥, 100 💯 और हार्ट ❤️ इमोजी कमेंट किए, जो उनके पूर्ण समर्थन का संकेत है।

रहीमा ने भी पोस्ट रीशेयर किया। बेटियों का यह कदम परिवार की एकजुटता दिखाता है, जबकि बेटे एआर अमीन ने अभी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

अन्य सपोर्ट:

परेश रावल ने लिखा: “हम आपसे प्यार करते हैं सर, आप हमारे गौरव हैं।”

वरुण ग्रोवर ने कहा कि रहमान पर “जबरदस्ती माफी मांगने” का दबाव बनाया गया।

महबूबा मुफ्ती, अखिलेश यादव जैसे नेता भी उनके पक्ष में आए, जबकि जावेद अख्तर ने असहमति जताई।

यह विवाद फ्रीडम ऑफ स्पीच vs. सम्मानजनक असहमति पर बहस छेड़ रहा है। रहमान की बेटियों का सपोर्ट दिखाता है कि परिवार उनके साथ खड़ा है, खासकर जब आलोचना व्यक्तिगत हमलों में बदल गई। क्या यह विवाद शांत होगा या और बढ़ेगा? समय बताएगा!

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