मारुति सुजुकी का गुजरात में ₹35,000 करोड़ का मेगा निवेश: 10 लाख कारों की सालाना क्षमता, 12,000 नई नौकरियां!
मारुति सुजुकी का गुजरात में ₹35,000 करोड़ का मेगा निवेश: 10 लाख कारों की सालाना क्षमता, 12,000 नई नौकरियां!
देश की सबसे बड़ी पैसेंजर कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने गुजरात में एक नया विशाल वाहन विनिर्माण प्लांट लगाने की घोषणा की है। यह प्लांट खोराज (Khoraj) इलाके में बनेगा, जहां कंपनी कुल ₹35,000 करोड़ का निवेश करेगी। इस प्रोजेक्ट से सालाना 10 लाख वाहनों की उत्पादन क्षमता जुड़ेगी और लगभग 12,000 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। साथ ही, इससे जुड़े एंसेलरी यूनिट्स और MSME सेक्टर में 7.5 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्य बातें:
प्लांट की डिटेल्स: यह नया प्लांट गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GIDC) द्वारा उपलब्ध कराई गई 1,750 एकड़ जमीन पर बनेगा। यहां चार अलग-अलग उत्पादन लाइनें लगेंगी, जिनमें से हर एक की क्षमता 2.5 लाख कारों की होगी। कुल मिलाकर सालाना 10 लाख वाहन बनाए जा सकेंगे।
उत्पादन शुरू: पहली प्लांट से उत्पादन वित्त वर्ष 2029 से शुरू होने की उम्मीद है। यह चरणबद्ध तरीके से विकसित होगा।
कंपनी का लक्ष्य: मारुति सुजुकी अपनी कुल उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 40 लाख यूनिट्स प्रति वर्ष करना चाहती है, ताकि घरेलू मांग और बढ़ते निर्यात को पूरा किया जा सके। 2025 में कंपनी ने रिकॉर्ड 22.55 लाख से ज्यादा वाहन बनाए, जिसमें निर्यात भी शामिल है।
गुजरात में मौजूदा मौजूदगी: कंपनी का हंसलपुर प्लांट पहले से है, जहां फिलहाल 7.5 लाख कारों की क्षमता है और इसे FY27 तक 10 लाख तक बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा ₹21,000 करोड़ का निवेश पहले से किया जा चुका है और ₹3,200 करोड़ का अतिरिक्त निवेश चौथी लाइन के लिए चल रहा है। खोराज प्लांट के साथ गुजरात कंपनी की कुल क्षमता का बड़ा हिस्सा बन जाएगा।
सरकारी समर्थन: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 17 जनवरी 2026 को गांधीनगर में एक समारोह में मारुति सुजुकी के एमडी हिशाशी टेकुची को निवेश लेटर सौंपा। डिप्टी सीएम हर्ष संघवी भी मौजूद थे। यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ और भारत-जापान सहयोग को मजबूत करेगा।
यह निवेश गुजरात को ऑटोमोबाइल हब के रूप में और मजबूत बनाएगा, जहां पहले से ही कई ग्लोबल कंपनियां मौजूद हैं। मारुति सुजुकी के इस मेगा प्लान से न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा, बल्कि सप्लाई चेन, MSME और इकोनॉमी को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा।
यह कदम भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है, खासकर जब कंपनी घरेलू और वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही है!
