उत्तराखंड

नंदा देवी राजजात 2026 स्थगित! 23 जनवरी को अंतिम फैसला, विवाद और तैयारी पर सस्पेंस

नंदा देवी राजजात 2026 स्थगित! 23 जनवरी को अंतिम फैसला, विवाद और तैयारी पर सस्पेंस

उत्तराखंड की सबसे पवित्र और चुनौतीपूर्ण धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात (Nanda Devi Raj Jat Yatra) 2026 में स्थगित होने की खबरों ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में हलचल मचा दी है। हर 12 साल में होने वाली यह ‘हिमालयी महाकुंभ’ मानी जाने वाली यात्रा, जो एशिया की सबसे लंबी और कठिन पैदल यात्रा है, अब अनिश्चितता के घेरे में है। राज्य सरकार और श्री नंदा देवी राजजात समिति की बैठक में 23 जनवरी को अंतिम फैसला लिया जाएगा।

क्यों स्थगित होने की चर्चा?

विवाद का मुख्य कारण: यात्रा के रूट मैप और प्रारंभिक बिंदु (नौटी गांव vs कुरुड़ गांव) पर विवाद। चमोली जिले के नंदा-धाम क्षेत्र के कुरुड़ और आसपास के गांवों के लोगों ने आरोप लगाया है कि परंपरागत रूट से छेड़छाड़ की जा रही है। वे दावा करते हैं कि ऐतिहासिक रूप से ‘बड़ी यात्रा’ कुरुड़ से शुरू होती थी, लेकिन वर्तमान रूट मैप और कैलेंडर में इसे बाहर किया गया है। इससे स्थानीय समुदाय में असंतोष बढ़ा।

तैयारी में देरी: यात्रा की लंबाई करीब 280 किमी है, जिसमें 19-23 दिन लगते हैं। उच्च ऊंचाई, दुर्गम रास्ते, रोपकुंड, होमकुंड जैसे पड़ाव और हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी जरूरी है। लेकिन केंद्र से आर्थिक सहायता, वेस्ट मैनेजमेंट, सेनिटेशन और SOP पर अभी भी चर्चा चल रही है।

पिछले उदाहरण: 2013 में उत्तराखंड आपदा के कारण यात्रा स्थगित कर 2014 में आयोजित की गई थी। अब भी मौसम, पर्यावरण और सुरक्षा को देखते हुए स्थगन की संभावना जताई जा रही है।

चार सींग वाले मेढ़े (चौसिंग्या खाड़ू) का मुद्दा: परंपरा के अनुसार, यात्रा में चार सींग वाला मेढ़ा अगुवाई करता है। हाल ही में कोटी गांव में ऐसे मेढ़े के जन्म की खबर आई, लेकिन विवाद के कारण इसका उपयोग भी अनिश्चित है।

यात्रा का महत्व और विशेषताएं

नंदा देवी राजजात यात्रा मां नंदा देवी की ‘मायके से ससुराल’ (नौटी से होमकुंड) की प्रतीकात्मक विदाई है। यह गढ़वाल और कुमाऊं की संस्कृति को जोड़ती है। हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और विदेशी पर्यटक भाग लेते हैं। इसमें ‘देवरथ’ (चार सींग वाला मेढ़ा) आगे चलता है और होमकुंड पर मुक्त किया जाता है। यात्रा में नौटी, कांसुवा, वन, बेडनी बुग्याल, रोपकुंड जैसे पड़ाव शामिल हैं।

सरकार और समिति का रुख

उत्तराखंड सरकार ने मुख्य सचिव के नेतृत्व में कई बैठकें की हैं। CM पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र से आर्थिक मदद मांगी है। समिति का कहना है कि यदि विवाद सुलझ गया तो यात्रा अगस्त-सितंबर 2026 में हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और सहमति पहले। 23 जनवरी को होने वाली बैठक में अंतिम फैसला आएगा – या तो यात्रा तय तारीख पर होगी या स्थगित कर अगले चक्र (2038) में टाली जाएगी।

श्रद्धालु और स्थानीय लोग अब 23 जनवरी का इंतजार कर रहे हैं। क्या यह यात्रा समय पर होगी या फिर 12 साल का इंतजार बढ़ जाएगा? कमेंट में अपनी राय बताएं।

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