माघ मेला 2026: ‘हमारे शिष्यों पर हाथ उठाया…’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गंभीर आरोप, मौनी अमावस्या स्नान से किया इनकार
माघ मेला 2026: ‘हमारे शिष्यों पर हाथ उठाया…’, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का गंभीर आरोप, मौनी अमावस्या स्नान से किया इनकार
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के सबसे पवित्र और व्यस्त स्नान पर्व पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रशासन पर अपने शिष्यों और संतों के साथ मारपीट और बदसलूकी का गंभीर आरोप लगाते हुए संगम में पवित्र स्नान करने से इनकार कर दिया। शंकराचार्य ने कहा, “हमारे शिष्यों पर हाथ उठाया गया… बड़े-बड़े अधिकारी संतों को मार रहे हैं।” इस घटना से मेला क्षेत्र में तनाव फैल गया और कई शिष्यों को हिरासत में भी लिया गया।
क्या हुआ घटना?
मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026) को लाखों श्रद्धालु संगम नोज पर स्नान के लिए पहुंचे थे। शंकराचार्य अपनी पालकी (रथ) में सवार होकर अखाड़े से संगम तट की ओर जा रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उनके जुलूस को आगे बढ़ने से रोक दिया और पैदल जाने की सलाह दी। आरोप है कि इसी दौरान यूपी सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता और पुलिसकर्मियों के साथ शिष्यों की धक्कामुक्की और झड़प हो गई। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके शिष्यों पर हाथ उठाया गया, मारपीट की गई और अपमानित किया गया।
शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मेरे शिष्यों से मारपीट हो रही है। हम स्नान नहीं करेंगे और वापस लौट रहे हैं।” उन्होंने पालकी बीच रास्ते से ही अखाड़े में वापस लौटा दी। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर हो रहा है, लेकिन यह आरोप असत्यापित है।
प्रशासन का पक्ष
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या पर संगम तट पर भारी भीड़ थी, जिससे सुरक्षा कारणों से जुलूस को रोका गया। शिष्यों ने बैरियर तोड़ने और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की, जिससे झड़प हुई। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया और स्थिति नियंत्रित की। प्रशासन ने कहा कि स्नान सुचारू रूप से चल रहा है और किसी को अपमानित करने का इरादा नहीं था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “घोर निंदनीय… ये किसके निर्देश पर हो रहा है? भाजपा सरकार में संतों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? शाही स्नान पहली बार नहीं हो रहा, कुशासन और नाकाम व्यवस्था जिम्मेदार है।” यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
माघ मेला 2026 का यह तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व था, जहां शाही स्नान के साथ लाखों लोग शामिल हुए। शंकराचार्य का स्नान बहिष्कार और आरोपों ने पूरे मेला में चर्चा का विषय बना दिया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संतों और प्रशासन के बीच तनाव बरकरार है। क्या यह विवाद और बढ़ेगा? कमेंट में अपनी राय बताएं।
