‘धरोहरों को तोड़ने का लाइसेंस किसी को नहीं’, मणिकर्णिका घाट पर सुमित्रा ताई ने सरकार को घेरा
‘धरोहरों को तोड़ने का लाइसेंस किसी को नहीं’, मणिकर्णिका घाट पर सुमित्रा ताई ने सरकार को घेरा
वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास कार्य के दौरान जेसीबी मशीनों से प्राचीन संरचनाओं और देवी अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी धरोहरों को नुकसान पहुंचने के आरोपों पर बड़ा बवाल मचा हुआ है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन (जिन्हें सुमित्रा ताई के नाम से जाना जाता है) ने मणिकर्णिका घाट पर जाकर या बयान देकर कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने कहा, “धरोहरों को तोड़ने का लाइसेंस किसी को नहीं”। सुमित्रा ताई ने अपनी ही सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मंदिरों पर मशीनें चढ़ाना लापरवाही नहीं, अपराध है। उन्होंने चेतावनी दी कि मणिकर्णिका जैसी पवित्र धरोहरों पर काम करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जैसे इंदौर या मैसूर में जीर्णोद्धार के दौरान की जाती है।
विवाद की वजह क्या है?
10-13 जनवरी 2026 के आसपास मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास में जेसीबी से पुरानी संरचनाएं, मंदिर के हिस्से और देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमाएं प्रभावित हुईं या तोड़ी गईं। वीडियो वायरल होने से आक्रोश फैला।
स्थानीय लोग, पाल समाज, मराठी समुदाय और अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट ने विरोध किया। आरोप है कि 300 साल पुरानी धरोहरें नष्ट हो रही हैं, विकास के नाम पर विनाश हो रहा है।
इंदौर राज परिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर ने जांच की मांग की और मूर्तियों को ट्रस्ट की सुपुर्दगी में देने की अपील की।
कांग्रेस ने भी हमला बोला – मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं ने पीएम मोदी पर निशाना साधा, कहा कि सदियों पुरानी धार्मिक-आध्यात्मिक विरासत को मिटाकर सिर्फ “नेम-प्लेट” चिपकाने की राजनीति हो रही है।
प्रशासन का पक्ष
वाराणसी DM सत्येंद्र कुमार ने सफाई दी कि कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया। जो कलाकृतियां/प्रतिमाएं मिलीं या प्रभावित हुईं, उन्हें सुरक्षित रखा गया है और पुनर्निर्माण के बाद सम्मानपूर्वक दोबारा स्थापित की जाएंगी।
घाट को चौड़ा करने, नए प्लेटफॉर्म, प्रदूषण रहित चिमनी, प्रतीक्षा कक्ष और हरित क्षेत्र बनाने का काम चल रहा है, क्योंकि अंत्येष्टि के लिए ज्यादा शव आ रहे हैं।
सुमित्रा ताई ने खुद वाराणसी कलेक्टर से फोन पर बात की और लिखित स्पष्टीकरण मांगा, जिसमें आश्वासन मिला कि सब कुछ ठीक किया जाएगा।
राजनीतिक असर
यह मामला बीजेपी के अंदर भी असहजता पैदा कर रहा है, क्योंकि सुमित्रा महाजन ने अपनी ही सरकार को घेरा है।
इंदौर और मालवा क्षेत्र में आक्रोश ज्यादा है, क्योंकि अहिल्याबाई होल्कर मध्य प्रदेश की लोकप्रिय शासक रहीं।
विरोध प्रदर्शन जारी हैं, और कुछ नेताओं ने अनशन की धमकी भी दी है।
मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में मोक्ष प्राप्ति का प्रमुख स्थल है, जहां 24 घंटे चिताएं जलती रहती हैं। इस धरोहर पर कोई भी बदलाव संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। सुमित्रा ताई का बयान दिखाता है कि धरोहरों की रक्षा पर राजनीतिक दल भी एकजुट हो सकते हैं! क्या अब काम रुकेगा या संशोधन होगा, ये आने वाले दिनों में साफ होगा।
