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बंगाल के बाद झारखंड में ED-पुलिस टकराव: आरोपी पर मारपीट का आरोप, ED दफ्तर पहुंची रांची पुलिस—साक्ष्य तलाशने में जुटी जांच टीम

बंगाल के बाद झारखंड में ED-पुलिस टकराव: आरोपी पर मारपीट का आरोप, ED दफ्तर पहुंची रांची पुलिस—साक्ष्य तलाशने में जुटी जांच टीम

पश्चिम बंगाल में ED और राज्य पुलिस के बीच आई-पैक मामले में टकराव के बाद अब झारखंड में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। रांची के ED क्षेत्रीय कार्यालय (एयरपोर्ट रोड) में 15 जनवरी की सुबह रांची पुलिस की टीम पहुंची, जहां मारपीट के आरोपों की जांच के लिए सबूत तलाशे जा रहे हैं। ED अधिकारियों पर पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार के साथ पूछताछ के दौरान मारपीट, सिर फोड़ने और जबरन बयान दर्ज कराने का आरोप लगा है।

विवाद की पूरी कहानी

आरोपी: संतोष कुमार (पेयजल विभाग के पूर्व क्लर्क), जो ₹23 करोड़ के पेयजल घोटाले में ED जांच के घेरे में है।

आरोप: 12 जनवरी 2026 को ED दफ्तर में पूछताछ के दौरान सहायक निदेशक (द्वितीय) प्रतीक और सहायक शुभम ने उन्हें जुर्म कबूल करने के लिए दबाव बनाया। मना करने पर मारपीट की, सिर फट गया (6 टांके लगे), गालियां दीं और साक्ष्य मिटाने की कोशिश की। अस्पताल में धमकी दी कि असली वजह डॉक्टरों को न बताएं और मीडिया/पुलिस/वकील से संपर्क न करें, वरना पत्नी-बच्चों को जेल भेज देंगे।

FIR: संतोष ने एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई (कांड संख्या 05/2026, धारा 115(2)/117(2)/127(2)/109(2)/351(2)/352/238/3(5) BNS)।

पुलिस एक्शन: आरोपों की गंभीरता देखते हुए रांची पुलिस ने जांच शुरू की। सदर DSP, एयरपोर्ट थाना प्रभारी और बड़ी पुलिस टीम सुबह 6 बजे ED दफ्तर पहुंची। CISF जवानों ने घेराबंदी की, इलाका छावनी जैसा बन गया। पुलिस सबूत (CCTV, मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेज) तलाश रही है।

ED का पक्ष

ED ने झारखंड पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर इस कार्रवाई को “अनियमित, अनावश्यक और उत्पीड़न” वाला बताया। ED का कहना है कि जांच चल रही है (CM हेमंत सोरेन से जुड़े भ्रष्टाचार केस में), और पुलिस की यह हरकत जांच में बाधा डालने वाली है।

सियासी बयानबाजी

BJP और विपक्ष: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने X पर लिखा कि पुलिस ED दफ्तर में साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश कर सकती है। कहा, “झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे।”

JMM सरकार: अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन राज्य पुलिस की कार्रवाई को ED की “अधिकारीय दबाव” के खिलाफ कदम माना जा रहा है।

बंगाल से तुलना

यह घटना पश्चिम बंगाल के आई-पैक रेड मामले से मिलती-जुलती है, जहां ED ने आरोप लगाया कि CM ममता बनर्जी ने रेड में दखल दिया और दस्तावेज छीन लिए। झारखंड में भी ED की जांच CM हेमंत सोरेन और उनके परिवार से जुड़े मामलों (मनी लॉन्ड्रिंग, घोटाले) पर केंद्रित है, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।

संक्षेप में, ED और झारखंड पुलिस के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है—पुलिस ED दफ्तर में जांच कर रही है, जबकि एजेंसी इसे उत्पीड़न बता रही है। क्या यह मामला हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचेगा? अभी तनाव जारी है!

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