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उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई तेज: देवरिया में मजार, संभल में सरकारी जमीन पर बने मकान ध्वस्त, वाराणसी में भी चली मशीनें!

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई तेज: देवरिया में मजार, संभल में सरकारी जमीन पर बने मकान ध्वस्त, वाराणसी में भी चली मशीनें!

उत्तर प्रदेश में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई का दौर जारी है। पिछले 48 घंटों में राज्य के तीन बड़े जिलों में एक साथ ध्वस्तीकरण अभियान चला, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है। देवरिया में एक मजार को अवैध बताकर ध्वस्त किया गया, संभल में सरकारी जमीन पर बने दर्जनों मकान तोड़े गए, जबकि वाराणसी में भी कई अवैध निर्माणों पर मशीनें चलीं।

देवरिया: मजार पर बुलडोजर, सैकड़ों लोग जमा

देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र में एक पुरानी मजार को अवैध अतिक्रमण बताकर 11 जनवरी 2026 को सुबह-सुबह बुलडोजर चला दिया गया। प्रशासन का दावा है कि ये मजार सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के बनी थी और इलाके में ट्रैफिक जाम का कारण बन रही थी। स्थानीय लोगों ने विरोध किया, लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी में कार्रवाई पूरी हुई। मजार के आसपास सैकड़ों लोग जमा हो गए और कुछ ने प्रदर्शन किया। प्रशासन ने कहा कि पहले नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

संभल: सरकारी जमीन पर बने 50+ मकान ध्वस्त

संभल जिले में 10-11 जनवरी को बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई हुई। प्रशासन ने बताया कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने करीब 50 से ज्यादा मकान, दुकानें और कमरे ध्वस्त किए गए। ये निर्माण चंदौसी रोड और आसपास के इलाकों में थे। जिला प्रशासन का कहना है कि ये अतिक्रमण सालों से चल रहा था और कई बार नोटिस दिए गए थे। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ।

वाराणसी: घाटों और सड़कों के किनारे चली मशीनें

वाराणसी में भी 11 जनवरी को अतिक्रमण हटाओ अभियान चला। घाटों के आसपास, सड़कों के किनारे और बाजारों में बने अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चले। प्रशासन ने बताया कि ये कार्रवाई शहर की साफ-सफाई और यातायात सुधार के लिए की गई। कई दुकानदारों और घर मालिकों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने स्थिति नियंत्रित रखी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सपा और कांग्रेस ने इसे “चुनिंदा कार्रवाई” बताया और आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को टारगेट किया जा रहा है।

BJP ने कहा कि ये सिर्फ कानून का पालन है, कोई धर्म या समुदाय से जुड़ा नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही निर्देश दिए थे कि अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विपक्ष का दावा है कि ये कार्रवाई 2027 विधानसभा चुनाव से पहले “पॉलराइजेशन” की कोशिश है।

प्रशासन का कहना है कि सभी जगह पहले नोटिस जारी किए गए थे और कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई। राज्य में पिछले कुछ महीनों से अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज है, और आने वाले दिनों में और कई जिलों में ऐसी कार्रवाई हो सकती है।

आपके इलाके में भी ऐसी कार्रवाई हुई है? या आप क्या सोचते हैं इस बारे में? कमेंट में बताएं।

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