अंकिता भंडारी हत्याकांड में जन आक्रोश चरम पर! 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान, बीजेपी ने लगाया विपक्ष पर राजनीतिक साजिश का आरोप
अंकिता भंडारी हत्याकांड में जन आक्रोश चरम पर! 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान, बीजेपी ने लगाया विपक्ष पर राजनीतिक साजिश का आरोप
देहरादून: उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड (2022) फिर से सुर्खियों में है। नए वायरल ऑडियो-वीडियो, कथित VIP एंगल और स्पेशल सर्विस जैसे खुलासों के बाद जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। विपक्षी दल कांग्रेस समेत विभिन्न सामाजिक संगठन, महिला मंच और पीड़ित परिवार ने सीबीआई जांच की मांग को तेज करते हुए रविवार, 11 जनवरी 2026 को पूरे उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है।
बंद का आह्वान और मांगें
अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने खुद भावुक अपील की है कि अंकिता सिर्फ उनकी बेटी नहीं, बल्कि पूरे भारत की बेटी है। उन्होंने व्यापारियों, टैक्सी यूनियन और अन्य संगठनों से बंद में सहयोग की अपील की।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने 10 जनवरी को मशाल जुलूस और 11 जनवरी को बंद का ऐलान किया।
मांग: कथित VIP का नाम उजागर, गिरफ्तारी और सीबीआई जांच (सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में)।
बीजेपी का पलटवार
उत्तराखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बंद और आंदोलन को राजनीतिक हथकंडा बताया। उन्होंने कहा:
“प्रदेश की जनता संयम बरते, विपक्षी दलों के झांसे में न आए।”
कांग्रेस इस संवेदनशील मुद्दे को उछालकर अंकिता की आत्मा को दुख पहुंचा रही है।
उनके पास विकास के मुद्दे नहीं हैं, इसलिए 2027 चुनाव के लिए माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की और उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का वादा किया।
सीएम धामी की बड़ी घोषणा
बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला अंकिता के माता-पिता की मांग और भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है। इससे पहले धामी ने कहा था कि सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है और कोई दोषी नहीं बचेगा।
अंकिता भंडारी (19) 18 सितंबर 2022 को पौड़ी के वनंतरा रिसॉर्ट में काम करती थीं। मुख्य आरोपी पुलकित आर्या (पूर्व भाजपा नेता के बेटे) समेत तीन को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, लेकिन नए खुलासों ने केस को फिर जीवित कर दिया है।
क्या बंद से सरकार पर और दबाव बढ़ेगा या सीबीआई जांच से मामला शांत होगा? उत्तराखंड की सियासत और जनता की नजरें 11 जनवरी पर टिकी हैं!
