उत्तराखंड

उत्तराखंड में जंगली सूअर और नीलगाय को मारने की सशर्त अनुमति: फसलों को नुकसान पहुंचाने पर ही मिलेगी परमिशन, जानिए पूरी प्रक्रिया

उत्तराखंड में जंगली सूअर और नीलगाय को मारने की सशर्त अनुमति: फसलों को नुकसान पहुंचाने पर ही मिलेगी परमिशन, जानिए पूरी प्रक्रिया

देहरादून, 8 जनवरी 2026: उत्तराखंड में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सूअर और नीलगाय (वन रोज) को लेकर वन विभाग ने सशर्त शिकार की अनुमति देने की प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक रंजन कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश के तहत वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 (संशोधित 2022) की अनुसूची-2 के प्रावधानों के आधार पर यह अनुमति दी जाएगी। यह केवल उन मामलों में लागू होगी जहां ये जानवर मानव जीवन, संपत्ति या खड़ी फसलों को खतरा पहुंचा रहे हों। महत्वपूर्ण: अनुमति सशर्त है और केवल वन क्षेत्र के बाहर मान्य होगी।

यह कदम किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर लिया गया है, क्योंकि जंगली सूअर और नीलगाय फसलों को बड़े पैमाने पर नष्ट कर रहे हैं। हालांकि, अनुमति बिना शर्तों के नहीं मिलेगी और दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई होगी।

परमिशन कैसे मिलेगी? पूरी प्रक्रिया

आवेदन करना: प्रभावित किसान या ग्रामवासी को विधिवत आवेदन करना होगा। इसमें फसल नुकसान का विवरण, जगह और जानवरों की गतिविधि की जानकारी देनी होगी।

ग्राम प्रधान की संस्तुति अनिवार्य: आवेदन पर ग्राम प्रधान की मुहर और संस्तुति जरूरी है।

वन विभाग को आवेदन: आवेदन संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी (DFO), वन क्षेत्राधिकारी या अन्य अधिकृत अधिकारी को सौंपना होगा। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने यह शक्तियां क्षेत्रीय वन संरक्षक, प्रभागीय वनाधिकारी, सहायक वन संरक्षक आदि तक डेलिगेट की हैं।

सर्वे और अनुमति: विभाग मौके पर जांच करेगा। अगर नुकसान साबित हुआ, तो सशर्त अनुमति दी जाएगी। अनुमति आमतौर पर सीमित समय (जैसे 15 दिन) के लिए होती है।

शर्तें:

शिकार केवल वन क्षेत्र से बाहर (खेतों में) ही किया जा सकता है।

लाइसेंसधारी हथियार (राइफल या पिस्टल) का इस्तेमाल।

घायल जानवर जंगल में भाग जाए तो पीछा नहीं किया जा सकता।

शव का निस्तारण वन विभाग की मौजूदगी में।

अनुमति के दुरुपयोग पर कानूनी कार्रवाई।

वन विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था फसलों की रक्षा के लिए है, न कि अंधाधुंध शिकार के लिए। किसानों से अपील है कि वे पहले विभाग से संपर्क करें और नियमों का पालन करें। अगर आपको नुकसान हो रहा है, तो नजदीकी वन कार्यालय या टोल-फ्री नंबर 1926 पर शिकायत दर्ज कराएं।

यह अनुमति पहले भी समय-समय पर दी जाती रही है, लेकिन अब प्रक्रिया को और स्पष्ट किया गया है। किसान भाइयों के लिए राहत की खबर, लेकिन सावधानी जरूरी!

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