राजनीति

मुस्तफिजुर रहमान विवाद में जेडीयू नेता केसी त्यागी का बयान: पार्टी नेतृत्व नाराज, कार्रवाई की तलवार लटकी

मुस्तफिजुर रहमान विवाद में जेडीयू नेता केसी त्यागी का बयान: पार्टी नेतृत्व नाराज, कार्रवाई की तलवार लटकी

पटना/नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले केसी त्यागी एक बार फिर अपने बयान से विवादों में घिर गए हैं। इस बार मुद्दा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान का है, जिन्हें बीसीसीआई के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) ने आईपीएल 2026 से रिलीज कर दिया था। त्यागी ने खेल और राजनीति को अलग रखने की वकालत की, जिससे पार्टी नेतृत्व खासा नाराज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, त्यागी की पार्टी से ‘छुट्टी’ हो सकती है।

विवाद की जड़ यह है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों और अत्याचार के बीच मुस्तफिजुर को आईपीएल में खेलने की अनुमति पर देशभर में विरोध हुआ था। बीसीसीआई ने जनभावनाओं को देखते हुए केकेआर को उन्हें रिलीज करने का निर्देश दिया। लेकिन केसी त्यागी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि “खेल और राजनीति को मिलाना नहीं चाहिए”। उन्होंने बांग्लादेश द्वारा हिंदू क्रिकेटर लिटन दास को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए कप्तान बनाने का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को भी मुस्तफिजुर के मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए। त्यागी ने यह भी जोड़ा कि बांग्लादेश ने अल्पसंख्यक को कप्तान बनाकर सकारात्मक संदेश दिया है।

जेडीयू सूत्रों के अनुसार, यह बयान पार्टी लाइन और वर्तमान जनभावना के पूरी तरह खिलाफ है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “जेडीयू एक क्षेत्रीय पार्टी है, हमें हर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर बयान देने की जरूरत नहीं। त्यागी जी ने बिना नेतृत्व से चर्चा किए बोल दिया, जो अस्वीकार्य है।” पार्टी ने स्पष्ट किया कि त्यागी का बयान व्यक्तिगत है और इसे जेडीयू की आधिकारिक राय नहीं माना जाए।

यह पहली बार नहीं जब त्यागी के बयान से पार्टी संकट में पड़ी है। पहले भी इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे, अग्निवीर योजना और अन्य मामलों पर उनके बयानों से एनडीए गठबंधन में असहजता हुई थी, जिसके बाद 2024 में उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब वे नीतीश कुमार के राजनीतिक सलाहकार हैं, लेकिन इस नए विवाद से उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में उनसे जवाब तलब किया जा सकता है और कार्रवाई भी हो सकती है।

दूसरी तरफ, जेडीयू के कुछ नेता जैसे एमएलसी गुलाम गौस ने बीसीसीआई के फैसले की आलोचना की थी, लेकिन त्यागी का रुख पार्टी के हिंदू वोट बैंक और एनडीए की लाइन से अलग माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार की बीजेपी के साथ नजदीकी को देखते हुए ऐसे बयान पार्टी के लिए नुकसानदेह हैं।

मुस्तफिजुर विवाद ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया है, जहां बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप के भारत में मैच शिफ्ट करने की मांग की है। त्यागी का बयान इस आग में घी डालने वाला साबित हो रहा है। अब नजर इस पर है कि जेडीयू नेतृत्व क्या कदम उठाता है – क्या त्यागी को फिर से साइडलाइन किया जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

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