अमेरिका-रूस में बढ़ा तनाव: उत्तर अटलांटिक में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ पर अमेरिकी सेना ने किया कब्जा
अमेरिका-रूस में बढ़ा तनाव: उत्तर अटलांटिक में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ पर अमेरिकी सेना ने किया कब्जा
नई दिल्ली/वाशिंगटन, 7 जनवरी 2026: अमेरिका और रूस के बीच तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नौसेना ने उत्तर अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले विशाल तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ (पहले बेला-1 के नाम से जाना जाता था) को जब्त कर लिया। अमेरिकी यूरोपीय कमान (US European Command) ने बुधवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। यह कार्रवाई वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल व्यापार को रोकने के अमेरिकी अभियान का हिस्सा है।
यह टैंकर पिछले कई हफ्तों से अमेरिकी बलों के पीछा करने के बाद पकड़ा गया। दिसंबर में कैरिबियन सागर में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की थी, लेकिन जहाज भाग निकला। इसके बाद जहाज ने अपना नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर लिया और रूसी झंडा लगा लिया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा है, जो ईरान, रूस और वेनेजुएला जैसे प्रतिबंधित देशों से अवैध तेल ढोता है।
अमेरिकी यूरोपीय कमान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “न्याय विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए एम/वी बेला-1 को जब्त किया है। जहाज को उत्तर अटलांटिक में अमेरिकी संघीय अदालत के वारंट के तहत कब्जे में लिया गया।” ऑपरेशन में कोई प्रतिरोध नहीं हुआ और क्रू ने सहयोग किया।
रूस ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। रूसी परिवहन मंत्रालय ने इसे 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि किसी देश को दूसरे देश के झंडे वाले जहाज पर बल प्रयोग का अधिकार नहीं है। रूस ने पहले इस टैंकर की सुरक्षा के लिए पनडुब्बी और अन्य नौसैनिक जहाज भेजे थे, लेकिन जब्ती के समय वे पास नहीं थे।
यह घटना वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हालिया गिरफ्तारी के बाद आई है, जिसे अमेरिका ने विशेष अभियान में पकड़ा था। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर पूर्ण नाकाबंदी लगा रखी है। इसी क्रम में आज ही कैरिबियन सागर में एक अन्य प्रतिबंधित टैंकर ‘एम/टी सोफिया’ को भी जब्त किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई रूस-अमेरिका संबंधों में नया तनाव पैदा कर सकती है, खासकर जब यूक्रेन युद्ध पर बातचीत चल रही है। रूस ने इसे “अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन” करार दिया है, जबकि अमेरिका इसे अपनी संप्रभुता और प्रतिबंधों की रक्षा बता रहा है।
यह मामला आने वाले दिनों में दोनों परमाणु शक्तियों के बीच कूटनीतिक विवाद को और गरमा सकता है।
