राजनीति

पृथ्वीराज चव्हाण के विवादित बयान से राजनीतिक तूफान: ‘क्या ट्रंप मोदी को भी अगवा कर लेंगे?’

पृथ्वीराज चव्हाण के विवादित बयान से राजनीतिक तूफान: ‘क्या ट्रंप मोदी को भी अगवा कर लेंगे?’

नई दिल्ली, 6 जनवरी 2026: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ का जिक्र करते हुए चव्हाण ने सवाल उठाया कि क्या भारत में भी वैसी ही स्थिति बन सकती है? उन्होंने कहा, “जो वेनेजुएला में हुआ, क्या वह भारत में भी हो सकता है? क्या ट्रंप साहब हमारे प्रधानमंत्री को भी किडनैप कर लेंगे?”

चव्हाण का यह बयान अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के संदर्भ में आया है। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत टैरिफ लगने से भारत-अमेरिका व्यापार व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाएगा, जिससे निर्यातकों को नुकसान होगा। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने वेनेजुएला मामले में भारत की चुप्पी की भी आलोचना की और कहा कि यह घटना संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है।

इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और प्रदीप भंडारी ने इसे कांग्रेस की ‘भारत विरोधी मानसिकता’ करार दिया। पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेताओं का ‘मानसिक दिवालियापन’ चरम पर पहुंच गया है, जबकि भंडारी ने इसे देश की संप्रभुता का अपमान बताया। पूर्व जम्मू-कश्मीर डीजीपी एसपी वैद ने भी चव्हाण की टिप्पणी को ‘देश के लिए अपमानजनक’ बताया और कहा कि भारत जैसे परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र की वेनेजुएला से तुलना शर्मनाक है।

सोशल मीडिया पर भी इस बयान की कड़ी आलोचना हो रही है। यूजर्स इसे ‘बेतुका’ और ‘ओछा’ बता रहे हैं। कुछ ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि एक अनुभवी नेता से ऐसी बचकानी बात की उम्मीद नहीं थी।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने हाल ही में पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत का एक एआई जनरेटेड वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें मोदी को ट्रंप के सामने झुकते दिखाया गया है। कैप्शन में लिखा था, ‘मोदी के डर का खामियाजा देश भुगत रहा है।’ यह वीडियो भी विवादों में घिरा हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस की ट्रंप की नीतियों और मोदी सरकार की विदेश नीति पर हमले की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसकी भाषा ने इसे उल्टा पड़ता दिख रहा है। अब देखना यह है कि कांग्रेस इस विवाद पर क्या सफाई देती है।

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