PDA पंचांग से अखिलेश का नया दांव: 2027 यूपी चुनाव से पहले PDA को घर-घर पहुंचाने की रणनीति, लेकिन BJP का ‘पाकिस्तानी कैलेंडर’ तंज!
PDA पंचांग से अखिलेश का नया दांव: 2027 यूपी चुनाव से पहले PDA को घर-घर पहुंचाने की रणनीति, लेकिन BJP का ‘पाकिस्तानी कैलेंडर’ तंज!
लखनऊ, 06 जनवरी 2026: समाजवादी पार्टी ने नए साल की शुरुआत एक अनोखे राजनीतिक संदेश के साथ की है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने समाजवादी PDA पंचांग-2026 का विमोचन किया, जिसे सपा PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज की एकता और चेतना का प्रतीक बता रही है। यह पंचांग सामान्य कैलेंडर से अलग है, क्योंकि इसमें PDA से जुड़े महापुरुषों की जयंती, पुण्यतिथि, सामाजिक आंदोलनों के महत्वपूर्ण दिन, राष्ट्रीय पर्व और ऐतिहासिक दिवसों का विशेष उल्लेख है।
पंचांग का प्रकाशन सपा के प्रदेश सचिव और अखिल भारतीय चौरसिया महासभा के अध्यक्ष अजय चौरसिया ने कराया है। विमोचन लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में हुआ, जहां अखिलेश ने कहा, “PDA समाज की एकता, चेतना और अधिकारों की लड़ाई समाजवादी आंदोलन की आत्मा है। यह पंचांग सिर्फ तिथियां बताने वाला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और वैचारिक जुड़ाव का माध्यम है।”
सपा की रणनीति साफ है – 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले PDA फॉर्मूले को मजबूत करना और इसे हर घर तक पहुंचाना। 2024 लोकसभा चुनाव में PDA ने सपा को अच्छे नतीजे दिए थे, अब पंचांग के जरिए पार्टी पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है। वाराणसी में भी इसका अलग से विमोचन किया गया, जो PDA को घर-घर ले जाने की योजना का हिस्सा है।
BJP का हमला: इस पंचांग पर राजनीतिक बवाल भी मच गया। BJP सांसद मनोज तिवारी ने इसे ‘पाकिस्तानी कैलेंडर’ करार दिया, क्योंकि इसमें अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की तारीख शामिल नहीं है। तिवारी ने कहा, “यह भारतीय संस्कृति का अपमान है। राम मंदिर की तिथि न होना राम विरोध का प्रमाण है।” BJP ने अल्पसंख्यक तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया।
क्या यह PDA पंचांग यूपी की राजनीति का माहौल बदल पाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि PDA वोटर्स को एकजुट करने में मदद मिल सकती है, लेकिन राम मंदिर जैसे मुद्दों पर BJP का काउंटर अटैक सपा के लिए चुनौती बनेगा। 2027 का चुनावी दंगल अब और रोचक हो गया है!
