ईरान में आर्थिक संकट से भड़का जनाक्रोश: तेहरान से 21 प्रांतों तक ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे, हिंसक झड़पों में कई मौतें!
ईरान में आर्थिक संकट से भड़का जनाक्रोश: तेहरान से 21 प्रांतों तक ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे, हिंसक झड़पों में कई मौतें!
तेहरान/ढाका, 1 जनवरी 2026: नए साल की शुरुआत ईरान में बड़े प्रदर्शनों और हिंसा से हुई है। बिगड़ती अर्थव्यवस्था, रिकॉर्ड महंगाई (40% से ज्यादा) और ईरानी रियाल की ऐतिहासिक गिरावट के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल गए हैं। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई हड़ताल अब 21 प्रांतों तक पहुंच चुकी है, जहां प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ और ‘डेथ टू डिक्टेटर’ के नारे लगा रहे हैं। कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की मौत की खबरें हैं।
प्रदर्शन 28-29 दिसंबर 2025 से तेहरान के बाजारों में दुकानदारों की हड़ताल से शुरू हुए, जब रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा। अब छात्र, व्यापारी, महिलाएं और आम लोग सड़कों पर हैं। तेहरान, इस्फहान, शिराज, करमानशाह, याज्द और लॉर्डेगान जैसे शहरों में पुलिस ने आंसू गैस और गोली चलाई। मानवाधिकार संगठनों और सरकारी मीडिया के अनुसार, लॉर्डेगान, कुहदश्त और इस्फहान में कम से कम 3-10 लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों घायल हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सुरक्षा बलों के एक सदस्य की भी मौत बताई गई है।
प्रदर्शनकारियों के नारे सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं – ‘इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद’, ‘मुल्लाओं को देश छोड़ना होगा’ और पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में नारेबाजी हो रही है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह सबसे बड़ा और खुला चुनौती माना जा रहा है। 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद यह सबसे व्यापक प्रदर्शन हैं।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रदर्शनकारियों से संवाद की बात कही और केंद्रीय बैंक गवर्नर को बर्खास्त कर दिया, लेकिन सुरक्षा बलों पर उनका नियंत्रण कम है। IRGC ने प्रदर्शनों को ‘विदेशी साजिश’ बताया। इंटरनेट पर पाबंदियां नहीं लगीं, लेकिन कई शहरों में सरकारी छुट्टी घोषित कर दफ्तर-बाजार बंद कराए गए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, यूरोप और मानवाधिकार संगठनों ने हिंसा की निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैंक्शंस, इजरायल-अमेरिका से तनाव और आंतरिक दमन से जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। क्या यह आंदोलन रिजीम चेंज की ओर बढ़ेगा? स्थिति पर नजर बनी हुई है – नए साल में ईरान की सड़कें उबाल पर हैं!
