राहुल को ‘भगवान राम’ बताने पर बवाल: नाना पटोले के बयान पर तेज प्रताप का तीखा वार – “कांग्रेस वाले खुद को भगवान समझते हैं!”
राहुल को ‘भगवान राम’ बताने पर बवाल: नाना पटोले के बयान पर तेज प्रताप का तीखा वार – “कांग्रेस वाले खुद को भगवान समझते हैं!”
मुंबई/पटना, 1 जनवरी 2026: नए साल की शुरुआत में महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष नाना पटोले ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से कर दी, जिससे सियासी हलकों में हंगामा मच गया। पटोले ने एक रैली में कहा, “राहुल गांधी वही काम कर रहे हैं जो भगवान राम करते थे। वे अन्याय के खिलाफ लड़ रहे हैं, गरीबों-वंचितों की आवाज बन रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे राम ने रावण का संहार किया।” इस बयान को कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जोरदार तालियों से सराहा, लेकिन विपक्ष ने इसे “धर्म का अपमान” और “अहंकार” करार दिया।
इस बयान पर सबसे करारा हमला बिहार के पूर्व मंत्री और राजद नेता तेज प्रताप यादव ने बोला। तेज प्रताप ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “आप मनुष्य की तुलना भगवान राम से कैसे कर सकते हैं? कांग्रेस नेता खुद को भगवान समझते हैं। किसी की तुलना भगवान से नहीं की जा सकती। कांग्रेस नेता हमेशा गुंडागर्दी का सहारा लेते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य सत्ता में आना है, उन्हें जनता की चिंताओं की कोई परवाह नहीं है।”
तेज प्रताप ने आगे कहा कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, जबकि कांग्रेस नेता “सत्ता के भूखे” हैं। उनका इशारा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और हालिया बयानों पर था, जिन्हें कांग्रेस “न्याय यात्रा” बता रही है। तेज प्रताप ने लालू प्रसाद यादव की पुरानी गठबंधन वाली बातें याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस अब “अहंकार” में डूब गई है।
महाराष्ट्र BJP ने भी मौके का फायदा उठाया। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “कांग्रेस हिंदू भावनाओं का अपमान कर वोट बैंक की राजनीति कर रही है। राहुल गांधी को राम बनाने की कोशिश से साफ है कि वे हिंदुत्व को हथियार बनाना चाहते हैं।” शिवसेना (UBT) ने भी नाना पटोले के बयान को “अनावश्यक” बताया, जबकि शिंदे गुट ने इसे “कांग्रेस की हताशा” करार दिया।
कांग्रेस ने बयान का बचाव किया। प्रवक्ता अतुल लोंधे ने कहा, “यह तुलना राम के आदर्शों से है – न्याय, समानता और संघर्ष की। इसमें कोई अपमान नहीं। विपक्ष इसे तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है।” राहुल गांधी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह विवाद 2026 में होने वाले स्थानीय चुनावों और 2027 विधानसभा चुनावों से पहले आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान ध्रुवीकरण बढ़ा सकते हैं। नए साल पर सियासी तापमान पहले ही चढ़ गया है!
