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बांग्लादेश में राजनीतिक भूचाल: चुनाव से पहले NCP ने जमात-ए-इस्लामी से गठजोड़ किया, पार्टी में फूट, कई बड़े नेता हुए अलग

बांग्लादेश में राजनीतिक भूचाल: चुनाव से पहले NCP ने जमात-ए-इस्लामी से गठजोड़ किया, पार्टी में फूट, कई बड़े नेता हुए अलग

ढाका, 28 दिसंबर 2025: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। हाल ही में गठित नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) ने आगामी आम चुनावों से पहले जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से NCP के अंदर भारी कलह मच गई है और कई प्रमुख नेता पार्टी छोड़कर अलग हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठजोड़ बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष राजनीति को नया मोड़ दे सकता है और चुनावी समीकरण बदल सकता है।

NCP की स्थापना अगस्त 2025 में हुई थी, जब छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार के पतन के बाद कई युवा नेता और पूर्व अवामी लीग सदस्यों ने इसे बनाया। पार्टी के संस्थापक और प्रमुख चेहरा नाहिद इस्लाम ने जमात के साथ गठबंधन को ‘राष्ट्रीय हित’ का फैसला बताया। उन्होंने कहा कि जमात का संगठनात्मक ढांचा और ग्रामीण पहुंच NCP को मजबूत बनाएगी। जमात-ए-इस्लामी लंबे समय से प्रतिबंधित रही, लेकिन अंतरिम सरकार ने इसे चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है।

हालांकि, यह ऐलान पार्टी के लिए महंगा पड़ गया। NCP के कई वरिष्ठ नेता और छात्र विंग के कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। पार्टी के सह-संस्थापक और प्रमुख छात्र नेता रिजवान हुसैन ने तुरंत इस्तीफा दे दिया और कहा, “जमात के साथ गठजोड़ छात्र आंदोलन की भावना के खिलाफ है। हम धर्मनिरपेक्षता और प्रगतिशील मूल्यों के लिए लड़े थे, न कि कट्टरपंथी ताकतों के साथ समझौता करने के लिए।” उनके साथ कई अन्य नेता जैसे असिफ महमूद और सारा हुसैन भी अलग हो गए। इन नेताओं ने नई पार्टी बनाने या स्वतंत्र उम्मीदवारों के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

छात्र संगठनों और लिबरल ग्रुप्स ने भी इस गठजोड़ की निंदा की है। उनका कहना है कि जमात का इतिहास 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान समर्थक भूमिका से जुड़ा है, जिसे बांग्लादेशी समाज कभी माफ नहीं करेगा। दूसरी तरफ, जमात के प्रवक्ता ने गठजोड़ का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘इस्लामी और राष्ट्रवादी ताकतों का मिलन’ है, जो अंतरिम सरकार की ‘अस्थिरता’ को खत्म करेगा।

चुनाव आयोग के अनुसार, आम चुनाव फरवरी 2026 में होने की संभावना है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने सभी पार्टियों से संवाद की अपील की है, लेकिन राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है। अवामी लीग अभी भी प्रतिबंधित है, जबकि BNP ने अलग रणनीति अपनाई है।

यह घटना बांग्लादेश की युवा-नेतृत्व वाली राजनीति में पहली बड़ी दरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि NCP का यह कदम अल्पकालिक लाभ दे सकता है, लेकिन लंबे समय में धर्मनिरपेक्ष वोट बैंक खोने का खतरा है। पार्टी में चल रही अंदरूनी कलह से चुनावी तैयारियां प्रभावित हो रही हैं और कई सीटों पर उम्मीदवारों का चयन रुका हुआ है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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