उत्तराखंड सचिवालय में बायोमेट्रिक हाजिरी पर लापरवाही: आदेशों की खुली अनदेखी, अनुशासन पर सवाल
उत्तराखंड सचिवालय में बायोमेट्रिक हाजिरी पर लापरवाही: आदेशों की खुली अनदेखी, अनुशासन पर सवाल
देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय, जहां प्रदेश की प्रशासनिक नीतियां बनती हैं और मुख्य सचिव खुद बैठते हैं, वहां कार्य संस्कृति और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 1 मई 2025 से सचिवालय में सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई थी, लेकिन महीनों बाद भी जमीनी हकीकत उलट है। मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों और बार-बार याद दिलाने के बावजूद कई कर्मचारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अप्रैल 2025 में ही सभी विभागों को 1 मई से बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने के आदेश दिए थे। सचिवालय प्रशासन के सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी ने हालिया पत्र जारी कर पुराने आदेशों की याद दिलाई और उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दोहराए। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि कई अधिकारी-कर्मचारी अभी भी नियम नहीं मान रहे। 20 मई 2025 को मोबाइल पर फेसियल रिकग्निशन सुविधा भी शुरू की गई, ताकि तकनीकी बहाने न बनें।
नियमों के मुताबिक, कार्यालय समय सुबह 9:30 से शाम 6:00 बजे तक है – कुल 8.30 घंटे। सप्ताह में न्यूनतम 42.5 घंटे कार्य अनिवार्य है। यदि कोई दिन केवल सुबह या शाम की हाजिरी लगती है, तो सॉफ्टवेयर उस दिन को शून्य मानता है। फिर भी बड़ी संख्या में कर्मचारी दोनों समय हाजिरी नहीं लगा रहे।
हैरानी की बात यह कि सचिवालय जैसे उच्चस्तरीय कार्यालय में आदेश बेअसर हैं। अब तक नियम तोड़ने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि जब सचिवालय में ही अनुशासन नहीं, तो प्रदेश के अन्य विभागों में जवाबदेही की क्या स्थिति होगी? यह लापरवाही कार्यक्षमता और जनसेवा पर असर डाल रही है।
सरकार को चाहिए कि सख्ती दिखाए और दोषियों पर कार्रवाई करे, ताकि अनुशासन की मिसाल कायम हो।
