बांग्लादेश में उबाल: भारत-विरोधी भावना और सत्ता की राजनीति, क्या मालदीव जैसा खेल दोहराया जा रहा?
बांग्लादेश में उबाल: भारत-विरोधी भावना और सत्ता की राजनीति, क्या मालदीव जैसा खेल दोहराया जा रहा?
ढाका, 20 दिसंबर 2025: बांग्लादेश में एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। जुलाई क्रांति के प्रमुख युवा नेता और कट्टर भारत-विरोधी शरीफ ओसमान हादी की सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत के बाद देशभर में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। हादी की हत्या के आरोपियों के भारत भागने की अफवाहों ने आग में घी डाल दिया है, जिससे प्रदर्शनकारी भारत दूतावासों और सहायक उच्चायोगों पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। ढाका, चटगांव और अन्य शहरों में भारत-विरोधी नारे गूंज रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर मीडिया हाउसों और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया।
यह स्थिति मालदीव में 2023 की ‘इंडिया आउट’ मुहिम की याद ताजा कराती है, जहां राष्ट्रवादी और चीन-समर्थक ताकतों ने भारत के खिलाफ भावनाओं को भुनाकर सत्ता हासिल की। बांग्लादेश में भी अंतरिम सरकार के तहत मुहम्मद यूनुस की अगुवाई में पाकिस्तान और चीन से नजदीकियां बढ़ रही हैं, जबकि भारत से दूरी बनाई जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रत्यर्पण मांग और अवामी लीग पर प्रतिबंध जैसे कदमों से भारत-समर्थक ताकतें कमजोर हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी 2026 के चुनाव से पहले कट्टरपंथी और जमात-ए-इस्लामी जैसे समूह भारत-विरोध को राजनीतिक हथियार बना रहे हैं, ताकि सत्ता की जंग में फायदा उठाया जा सके।
भारत ने इन घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेशी उच्चायुक्त को तलब कर प्रदर्शनों की निंदा की और राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा की मांग की। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, यह पाकिस्तान की शह पर चल रहा खेल है, जो बांग्लादेश को भारत के खिलाफ मोहरा बना रहा है। दूसरी तरफ, यूनुस सरकार ने हिंसा की निंदा की है, लेकिन कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं रख पाने के आरोप लग रहे हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। भारत-बांग्लादेश संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं, लेकिन वर्तमान उबाल अगर नहीं थमा तो दक्षिण एशिया में नया भू-राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है। क्या यह मालदीव फॉर्मूला का दोहराव है या आंतरिक सत्ता संघर्ष का हिस्सा? आने वाले दिन बताएंगे।
