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विवादों के बीच संचार साथी ऐप की धमाकेदार लोकप्रियता: एक महीने में डाउनलोड्स में कई गुना उछाल, ऐप स्टोर पर टॉप पर!

विवादों के बीच संचार साथी ऐप की धमाकेदार लोकप्रियता: एक महीने में डाउनलोड्स में कई गुना उछाल, ऐप स्टोर पर टॉप पर!

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के संचार साथी ऐप को लेकर प्राइवेसी और जासूसी के गंभीर आरोपों के बावजूद यह ऐप रिकॉर्ड तोड़ता नजर आ रहा है। दिसंबर 2025 में विवाद चरम पर पहुंचने के साथ ही ऐप के डाउनलोड्स में भारी उछाल आया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के सूत्रों के अनुसार, सामान्य दिनों में 60 हजार डाउनलोड्स वाले इस ऐप ने एक दिन में ही 6 लाख तक का आंकड़ा छू लिया, यानी 10 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी। कुल डाउनलोड्स 1.4 करोड़ से ऊपर पहुंच चुके हैं, और यह ऐप स्टोर पर नंबर-1 ट्रेंड कर रहा है।

विवाद की शुरुआत 28 नवंबर को हुई, जब DoT ने सभी नए स्मार्टफोन्स में ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का आदेश जारी किया। विपक्ष ने इसे ‘पेगासस जैसा जासूसी टूल’ बताकर हंगामा किया, प्राइवेसी का हवाला दिया। संसद में भी बवाल हुआ, लेकिन विवाद ने उलटा असर किया – लोगों में जिज्ञासा बढ़ी और डाउनलोड्स की बाढ़ आ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि बहस ने ऐप को सुर्खियों में ला दिया, जिससे लाखों यूजर्स ने इसे डाउनलोड कर खुद चेक किया।

ऐप क्या करता है?

संचार साथी साइबर फ्रॉड रोकने का सरकारी टूल है। इससे यूजर्स चोरी हुए फोन को ब्लॉक कर सकते हैं, IMEI चेक कर नकली डिवाइस पहचान सकते हैं, फर्जी कनेक्शन रिपोर्ट कर सकते हैं और स्पैम/फ्रॉड कॉल्स की शिकायत कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि यह यूजर की परमिशन से ही काम करता है, माइक, लोकेशन या OS एक्सेस नहीं करता। यूजर्स इसे कभी भी अनइंस्टॉल कर सकते हैं।

विवाद के बाद सरकार ने प्री-इंस्टॉलेशन को स्वैच्छिक कर दिया, लेकिन लोकप्रियता नहीं रुकी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह नागरिकों की सुरक्षा के लिए है। विपक्ष इसे निगरानी का हथियार बता रहा है। फिलहाल, विवाद ने ऐप को ‘हिट’ बना दिया है – साइबर सुरक्षा के लिए अच्छी खबर, लेकिन प्राइवेसी डिबेट जारी है।

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