डेनमार्क में स्कूल-यूनिवर्सिटी में बुर्का-नकाब पर बैन: चेहरा छिपाने वाले कपड़ों पर सख्ती
डेनमार्क में स्कूल-यूनिवर्सिटी में बुर्का-नकाब पर बैन: चेहरा छिपाने वाले कपड़ों पर सख्ती
कोपेनहेगन: यूरोपीय देश डेनमार्क ने शैक्षणिक संस्थानों में चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 17 दिसंबर 2025 को घोषणा की कि मौजूदा सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब के बैन को अब स्कूलों और यूनिवर्सिटी तक विस्तार दिया जाएगा। इससे क्लासरूम में बुर्का, नकाब या ऐसा कोई भी परिधान जो चेहरा छिपाता हो, पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा।
डेनमार्क में अगस्त 2018 से ही सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले इस्लामी परिधानों पर बैन है, जिसके उल्लंघन पर जुर्माना लगता है। अब सरकार इसे शिक्षा क्षेत्र तक ले जाना चाहती है। प्रवासन और एकीकरण मंत्री रासमस स्टोकलुंड ने बयान में कहा, “बुर्का, नकाब या चेहरा छिपाने वाले किसी भी कपड़े की डेनिश क्लासरूम में कोई जगह नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर यह बैन पहले से है, इसे शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू करना स्वाभाविक है।”
यह प्रस्ताव फरवरी 2026 में संसद में पेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने जून में ही इसकी इच्छा जताई थी। सरकार का तर्क है कि शिक्षा में संवाद, पहचान और एकीकरण जरूरी है, जो चेहरा ढकने से प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सेक्युलरिज्म और सामाजिक एकता को मजबूत करेगा, लेकिन मुस्लिम समुदाय में इसे भेदभाव के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोप में कई देशों जैसे फ्रांस, बेल्जियम और ऑस्ट्रिया में पहले से ऐसे प्रतिबंध हैं। डेनमार्क की यह पहल इस्लामोफोबिया और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस को फिर गरमा सकती है। मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया है, जबकि समर्थक इसे महिलाओं की समानता और सुरक्षा से जोड़ रहे हैं।
यह फैसला डेनमार्क की सख्त आव्रजन नीतियों का हिस्सा है, जो विवादों में रहती हैं। आने वाले महीनों में संसद की बहस इस पर अंतिम मुहर लगाएगी।
