साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत आज: बुध प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा से मिलेगी विशेष कृपा!
साल 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत आज: बुध प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा से मिलेगी विशेष कृपा!
नई दिल्ली, 17 दिसंबर 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, आज बुधवार, 17 दिसंबर को साल 2025 का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। यह पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है, जिसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। बुधवार होने से यह व्रत बुद्धि, ज्ञान, व्यापार और मानसिक स्पष्टता के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और नए साल की शुरुआत शुभ होती है।
शुभ मुहूर्त और तिथि विवरण
त्रयोदशी तिथि आरंभ: 16 दिसंबर रात 11:57 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 दिसंबर रात 02:32 बजे तक
प्रदोष पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 05:27 बजे से रात 08:11 बजे तक (दिल्ली के अनुसार, अन्य शहरों में थोड़ा अंतर हो सकता है)
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं, जो पूजा को और शुभ बनाते हैं।
पूजा विधि: सरल तरीके से करें शिव आराधना
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, व्रत का संकल्प लें।
शाम को शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल-फूल, चंदन चढ़ाएं।
“ओम नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा या प्रदोष स्तोत्र पढ़ें।
आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
व्रत फलाहार (फल, दूध) से तोड़ें।
महत्व: क्यों खास है यह अंतिम प्रदोष?
प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है। बुध प्रदोष पर पूजा से बुद्धि तेज होती है, व्यापार में लाभ और मानसिक तनाव दूर होता है। साल का आखिरी व्रत होने से नए साल में सुख-समृद्धि की कामना के लिए विशेष है। भक्तों का मानना है कि इस दिन शिवजी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
आज शाम प्रदोष काल में पूजा अवश्य करें – महादेव की कृपा से जीवन आनंदमय बनेगा! हर-हर महादेव!
