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यूक्रेनी बच्चों का रूस में ‘रूसीकरण’: ब्रेनवॉशिंग के गंभीर आरोप, क्या है हकीकत और क्यों हो रही अंतरराष्ट्रीय निंदा?

यूक्रेनी बच्चों का रूस में ‘रूसीकरण’: ब्रेनवॉशिंग के गंभीर आरोप, क्या है हकीकत और क्यों हो रही अंतरराष्ट्रीय निंदा?

कीव/मॉस्को, 17 दिसंबर 2025: यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच यूक्रेनी बच्चों को रूस ले जाकर उनका ‘ब्रेनवॉशिंग’ करने और रूसी संस्कृति में ढालने के आरोप लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हां, ऐसे मामले हो रहे हैं जहां हजारों यूक्रेनी बच्चों को जबरन रूस ले जाया गया है और उन्हें रूसी पहचान सिखाई जा रही है। यह ‘रूसीकरण’ (Russification) की प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों की यूक्रेनी पहचान मिटाकर उन्हें रूसी इतिहास, भाषा और राष्ट्रवाद से जोड़ा जाता है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसे युद्ध अपराध बताया है, जबकि रूस इन्हें ‘सुरक्षा’ के लिए स्थानांतरण बताता है।

ब्रेनवॉशिंग कैसे हो रहा है?

रूस ने यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों और रूस में 200 से ज्यादा कैंप, स्कूल, मिलिट्री बेस और अन्य सुविधाएं बनाई हैं। यहां बच्चों को रूसी राष्ट्रगान गाना, रूसी इतिहास पढ़ना और यूक्रेन को ‘दुश्मन’ बताने वाली कहानियां सिखाई जाती हैं।

मिलिट्री ट्रेनिंग: 8 साल के बच्चों को हथियार चलाना, ड्रोन असेंबल करना, ग्रेनेड फेंकना और कॉम्बैट ड्रिल्स कराए जाते हैं। उन्हें ‘रूसी सैनिक’ बनाने की कोशिश की जाती है।

पहचान मिटाना: बच्चों के नाम बदल दिए जाते हैं, जन्मतिथि बदलकर रूसी दस्तावेज दिए जाते हैं। वे यूक्रेनी भाषा बोलने से मना करते हैं और यूक्रेन को नफरत की नजर से देखते हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया, “यह एक पाइपलाइन है जहां यूक्रेनी बच्चों को ब्रेनवॉश कर सैनिक बनाया जाता है।”

कितने बच्चे प्रभावित?

2022 से अब तक 19,546 बच्चों को जबरन ले जाया गया है, जिनमें से सिर्फ 1,762 को वापस लाया जा सका है।

कब्जे वाले इलाकों में 16 लाख से ज्यादा बच्चे रूसी प्रभाव में हैं, जहां बिना स्थानांतरण के ही मानसिक रूप से रूसीकरण किया जा रहा है।

ये कैंप रूस सरकार द्वारा संचालित हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि हुए हैं। सैटेलाइट इमेज से कैंपों का विस्तार दिखता है।

रूसीकरण के आरोप क्यों?

यह प्रक्रिया ‘औद्योगिक स्तर’ की है, जैसे रूस ने अपनी मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स बनाई। उद्देश्य: यूक्रेनी पहचान मिटाकर रूसी नागरिक बनाना, ताकि वे भविष्य में रूस के लिए लड़ें।

बच्चों को यूक्रेन से नफरत सिखाई जाती है, जिससे वे वापस आने पर ‘कल्ट’ से निकले जैसे व्यवहार करते हैं – बोलते नहीं, खेलते नहीं, बस आज्ञाकारी बन जाते हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा, “रूस ब्रेनवॉशिंग में माहिर है, यह एक युद्ध मशीन है।”

अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन: जेनेवा कन्वेंशन और यूएन चाइल्ड राइट्स का violation, जो बच्चों के जबरन स्थानांतरण को अपराध मानते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चुनौतियां

ICC ने 2023 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और बच्चों की आयुक्त मारिया ल्वोवा-बेलोवा के खिलाफ वारंट जारी किया।

ब्रिटेन ने 2024 में संलिप्त अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए। यूक्रेन का ‘ब्रिंग किड्स बैक’ प्रोग्राम बच्चों को वापस लाने में लगा है, लेकिन चुनौतियां बड़ी हैं – बच्चे ट्रॉमेटाइज्ड होते हैं, डी-इंडोक्रिनेशन में समय लगता है।

येल यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट्स ने सैटेलाइट इमेज और रूसी दस्तावेजों से सबूत दिए हैं। यूक्रेनी अधिकारी कहते हैं, यह युद्ध का हिस्सा है, बच्चों की वापसी शांति समझौते की शर्त होगी।

यह मामला न सिर्फ मानवीय संकट है, बल्कि जनसंहार (genocide) के तत्व भी दिखाता है। रूस इनकार करता है, लेकिन सबूत बढ़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अंतरराष्ट्रीय दबाव के यह रुकना मुश्किल है।

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