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शादी से पहले ब्लड ग्रुप चेक करना जरूरी क्यों? गलत कॉम्बिनेशन से क्या हो सकता है?

शादी से पहले ब्लड ग्रुप चेक करना जरूरी क्यों? गलत कॉम्बिनेशन से क्या हो सकता है?

शादी से पहले ब्लड ग्रुप (A, B, AB, O और Rh फैक्टर + या -) चेक कराना जरूरी तो नहीं है, लेकिन अत्यधिक अनुशंसित है, खासकर अगर आप बच्चे प्लान कर रहे हैं। ब्लड ग्रुप का रिश्ते की खुशी, प्यार या व्यक्तित्व से कोई संबंध नहीं है – यह एक मिथक है। लेकिन प्रेग्नेंसी में कुछ कॉम्बिनेशन से बच्चे की सेहत को खतरा हो सकता है। मुख्य दो मुद्दे हैं:

1. Rh फैक्टर इनकंपैटिबिलिटी (सबसे आम चिंता)

अगर मां Rh-नेगेटिव है और पिता Rh-पॉजिटिव, तो बच्चा Rh-पॉजिटिव हो सकता है।

पहली प्रेग्नेंसी में आमतौर पर कोई समस्या नहीं होती।

लेकिन दूसरी या बाद की प्रेग्नेंसी में मां के शरीर में एंटीबॉडी बन सकती हैं, जो बच्चे की रेड ब्लड सेल्स को नष्ट कर सकती हैं। इससे बच्चे को हीमोलिटिक डिजीज (जॉन्डिस, एनीमिया, हार्ट फेलियर या गंभीर मामलों में मृत्यु) हो सकता है।

समाधान: आसान है! प्रेग्नेंसी के 28वें हफ्ते में और डिलीवरी के बाद Anti-D इंजेक्शन (RhoGAM) लगवा लें। इससे समस्या पूरी तरह रोकी जा सकती है।

2. थैलेसीमिया (भारत में बहुत महत्वपूर्ण)

थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, जहां हीमोग्लोबिन कम बनता है।

अगर दोनों पार्टनर थैलेसीमिया माइनर (कैरियर) हैं, तो बच्चे को 25% चांस थैलेसीमिया मेजर का होता है – जिसमें बच्चे को जीवनभर ब्लड ट्रांसफ्यूजन और महंगी दवाएं चाहिए।

ब्लड ग्रुप टेस्ट के साथ HbA2 या HPLC टेस्ट से थैलेसीमिया का पता चलता है।

भारत में थैलेसीमिया कैरियर 3-4% लोगों में होता है, इसलिए प्री-मैरिटल स्क्रीनिंग जरूरी।

ABO ब्लड ग्रुप (A, B, AB, O) का प्रभाव?

ABO इनकंपैटिबिलिटी से हल्की जॉन्डिस हो सकती है, लेकिन यह दुर्लभ और आसानी से ट्रीट होती है।

शादी या बच्चे पर कोई बड़ा असर नहीं।

निष्कर्ष: ब्लड ग्रुप चेक कराना शादी टूटने का कारण नहीं बनना चाहिए। ज्यादातर समस्याएं मैनेजेबल हैं। लेकिन जानकारी से आप पहले से तैयारी कर सकते हैं – डॉक्टर से काउंसलिंग लें, टेस्ट करवाएं। स्वस्थ बच्चे के लिए यह छोटा कदम बड़ा फायदा देगा!

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