बॉन्डी बीच आतंकी हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया में बंदूक कानूनों को और सख्त करने का फैसला
बॉन्डी बीच आतंकी हमले के बाद ऑस्ट्रेलिया में बंदूक कानूनों को और सख्त करने का फैसला
सिडनी, 15 दिसंबर 2025: ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर रविवार को हुए भयावह आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। हनुक्का उत्सव मनाने आई यहूदी समुदाय की भीड़ पर पिता-पुत्र ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई और 40 से ज्यादा घायल हो गए। पुलिस ने इसे यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया एंटीसेमिटिक आतंकी हमला करार दिया है।
हमलावरों की पहचान 50 वर्षीय साजिद अकरम और उनके 24 वर्षीय बेटे नवेद अकरम के रूप में हुई है। साजिद, जो लाइसेंस प्राप्त बंदूक मालिक थे और उनके पास 6 रजिस्टर्ड हथियार थे, पुलिस गोलीबारी में मारे गए। नवेद गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में पुलिस हिरासत में है। पुलिस ने घटनास्थल से कई हथियार बरामद किए हैं।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को नेशनल कैबिनेट की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई, जिसमें सभी राज्य और क्षेत्र के नेता सहमत हुए कि बंदूक कानूनों को और मजबूत किया जाएगा। मुख्य प्रस्तावित बदलावों में शामिल हैं:
बंदूक लाइसेंस केवल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को ही जारी करना।
एक व्यक्ति के पास रखी जा सकने वाली बंदूकों की संख्या पर सख्त सीमा लगाना।
लाइसेंस की वैधता अवधि सीमित करना और नियमित बैकग्राउंड चेक अनिवार्य करना।
कुछ प्रकार की बंदूकों पर अतिरिक्त प्रतिबंध।
नेशनल फायरआर्म्स रजिस्टर को तेजी से लागू करना।
अल्बनीज ने कहा, “यह शुद्ध बुराई का कृत्य था, एंटीसेमिटिज्म और आतंकवाद। हम अपनी कम्युनिटी को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।” NSW प्रीमियर क्रिस मिन्स ने भी राज्य संसद को बुलाकर कानून बदलने की संभावना जताई।
1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही दुनिया के सबसे सख्त बंदूक कानून हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ इनमें ढील आई है और अब बंदूकों की संख्या फिर बढ़ रही है। यह हमला 30 साल में सबसे घातक मास शूटिंग है।
देशभर में शोक vigils हो रहे हैं, और यहूदी समुदाय को समर्थन की लहर उमड़ रही है। जांच जारी है।
