गृह मंत्रालय का सख्त फरमान: अनमोल बिश्नोई तिहाड़ में ‘लॉक’, 1 साल तक पुलिस-एजेंसी कस्टडी पर रोक!
गृह मंत्रालय का सख्त फरमान: अनमोल बिश्नोई तिहाड़ में ‘लॉक’, 1 साल तक पुलिस-एजेंसी कस्टडी पर रोक!
नई दिल्ली: कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई को लेकर गृह मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद मंत्रालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत एक साल के लिए उनकी फिजिकल कस्टडी पर रोक लगा दी। अब अगले 12 महीनों तक कोई भी राज्य पुलिस या जांच एजेंसी उन्हें तिहाड़ जेल से बाहर लेकर पूछताछ नहीं कर सकेगी। अगर किसी को जरूरत पड़े, तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या जेल में ही बातचीत करनी होगी। यह फैसला सुरक्षा कारणों से लिया गया है, क्योंकि अनमोल की जान को खतरा माना जा रहा है।
अनमोल बिश्नोई को 19 नवंबर 2025 को अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत लाया गया था। कनाडा से फरार चल रहे इस गैंगस्टर को एयरपोर्ट पर ही NIA ने गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने पहले 11 दिनों की NIA कस्टडी दी, फिर 7 दिन और बढ़ाई गई। पूछताछ में अनमोल ने अपने गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग चेन और विदेशी कनेक्शनों के राज खोले। सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सलमान खान के घर फायरिंग, NCP नेता बाबा सिद्धीक की हत्या जैसे कई केसों में आरोपी अनमोल 2022 से फरार था। NIA और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने पर जुटी है।
यह आदेश उसके भाई लॉरेंस बिश्नोई पर पहले से लागू है, जिन्हें गुजरात की साबरमती जेल से दिल्ली लाने पर रोक लगी हुई है। BNSS की धारा 303 गृह मंत्रालय को यह पावर देती है कि किसी हाई-रिस्क कैदी को जेल से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया जा सके, ताकि हमला या भागने का खतरा न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गैंगवार रोकने में कारगर साबित होगा, लेकिन पूछताछ में देरी से जांच प्रभावित हो सकती है।
अनमोल की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई, और अब तिहाड़ की बैरक नंबर 4 में वे ‘परमानेंट गेस्ट’ हैं। क्या यह फैसला बिश्नोई सिंडिकेट को तोड़ेगा? कानून की नजरें टिकी हैं।
