महायुति में दरार की आहट: शिंदे-बीजेपी एकजुट, लेकिन अजित पवार का ‘लीक’ गेम प्लान ने बढ़ाई सियासी उलझन!
महायुति में दरार की आहट: शिंदे-बीजेपी एकजुट, लेकिन अजित पवार का ‘लीक’ गेम प्लान ने बढ़ाई सियासी उलझन!
मुंबई: महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति (बीजेपी, शिंदे शिवसेना, अजित पवार NCP) में ‘गठबंधन धर्म’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बीजेपी ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) सहित निकाय चुनावों में एकजुट होकर लड़ने का ऐलान किया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का कथित ‘गेम प्लान’ लीक होने से हड़कंप मच गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजित पवार की NCP पश्चिमी महाराष्ट्र के मजबूत गढ़ों—जैसे पुणे, सतारा, अहमदनगर—में महायुति से अलग होकर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। यह प्लान शरद पवार की NCP (SP) से नजदीकी को भी दर्शाता है, जो चाचा-भतीजे के पुराने रिश्ते को नई सियासी रंगत दे रहा है।
लीक ड्राफ्ट के अनुसार, अजित पवार का प्लान ‘लोकल लॉयल्टी’ पर आधारित है। NCP 15-20 सीटों पर बीजेपी के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार सकती है, खासकर जहां मराठा-कुणबी वोट बैंक मजबूत है। नागपुर, नासिक और पालघर जैसे जिलों में शिंदे शिवसेना ने भी बीजेपी के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं, और अजित पवार का समर्थन हासिल कर लिया है। येओला नगरपरिषद में शिंदे सेना के रुपेश दराडे ने शरद पवार गुट के माणिकराव शिंदे के साथ मिलकर बीजेपी-NCP (अजित) गठबंधन को चुनौती दी। पालघर के दहानू में शिंदे ने अजित और शरद दोनों NCP के साथ गठजोड़ किया। यह ‘मैत्रीपूर्ण लड़ाई’ का नाम ले चुकी है, लेकिन विशेषज्ञ इसे महायुति की कमजोरी बता रहे हैं।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने सफाई दी, “वरिष्ठ नेता फडणवीस-शिंदे ने BMC चुनावों में हर हाल में गठबंधन का फैसला लिया है। अजित पवार का सहयोग जरूरी है, खासकर पश्चिमी महाराष्ट्र में।” लेकिन शिंदे ने ‘गठबंधन धर्म’ निभाने की नसीहत दी—कहा, “बीजेपी को भी सहयोगी दलों का सम्मान करना चाहिए।” हाल ही में महायुति ने ‘नो-पोचिंग पैक्ट’ किया, जिसमें नेताओं की दल-बदली पर रोक लगाई गई। नागपुर अधिवेशन में फडणवीस, शिंदे और अजित तीनों मिलकर सीट बंटवारे पर चर्चा करेंगे।
विपक्ष को इससे फायदा मिल रहा है। महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेता संजय राउत ने तंज कसा, “महायुति का ‘युति’ ही नहीं, ‘दरार’ ज्यादा है।” शरद पवार की NCP (SP) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने इसे कमजोरी का सबूत बताया। 2024 विधानसभा चुनाव में महायुति की 235 सीटों की जीत के बावजूद, निकाय चुनावों में जातिगत समीकरण और लोकल मुद्दे (जैसे मराठा आरक्षण) चुनौती बन सकते हैं। अजित पवार ने पिंपरी-चिंचवड़ में कार्यकर्ताओं से कहा, “हर पार्टी को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का अधिकार है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह लीक प्लान अजित पवार की ‘सुरक्षा जाल’ रणनीति है—अगर महायुति हारी, तो NCP का अस्तित्व बचे। BMC चुनाव 31 जनवरी 2026 से पहले होने हैं, जहां 227 सीटें दांव पर हैं। क्या अजित का ‘गेम’ महायुति को तोड़ देगा? सियासत की नजरें टिकी हैं।
