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ट्रंप का C5 ‘पावर ब्लॉक’: भारत को शामिल कर G7 को साइडलाइन करने की साजिश, यूरोप-NATO में हड़कंप

ट्रंप का C5 ‘पावर ब्लॉक’: भारत को शामिल कर G7 को साइडलाइन करने की साजिश, यूरोप-NATO में हड़कंप

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) ने वैश्विक कूटनीति में भूचाल ला दिया है। एक कथित ‘कोर-5’ या C5 नामक एलीट क्लब की चर्चा जोरों पर है, जिसमें अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान को शामिल किया जाना है। यह समूह G7 जैसी पश्चिमी-प्रधान फोरम को पीछे छोड़ते हुए आबादी, सैन्य और आर्थिक ताकत पर आधारित होगा। ट्रंप का यह ‘ट्रंपियन’ विचार मल्टीपोलर दुनिया को नया आकार देने का प्रयास लगता है, लेकिन इससे यूरोप और NATO में गहरी चिंता पैदा हो गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, C5 का पहला एजेंडा मिडिल ईस्ट की सुरक्षा होगा, खासकर इजरायल-सऊदी अरब संबंधों को सामान्य बनाना। G7 को ‘अपर्याप्त’ बताते हुए ट्रंप प्रशासन का ड्राफ्ट दस्तावेज सुझाव देता है कि यह नया क्लब नियमित समिट आयोजित करेगा, जहां लोकतंत्र या धन की बजाय ‘स्ट्रॉन्गमैन’ नेताओं के बीच डीलमेकिंग होगी। भारत की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ट्रंप की निकटता को देखते हुए, यह समूह इंडो-पैसिफिक में चीन के प्रभाव को संतुलित करने का हथियार बन सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस ‘लीक’ को खारिज कर दिया है, दावा करते हुए कि NSS का कोई वैकल्पिक संस्करण नहीं है। फिर भी, पूर्व NSC अधिकारी टॉरी तॉसिग ने इसे ट्रंप की ‘नॉन-आइडियोलॉजिकल’ सोच का प्रतिबिंब बताया। यूरोपीय डिफेंस अधिकारियों का कहना है कि रूस को समान दर्जा देकर यह योजना पुतिन को यूक्रेन युद्ध में यूरोप पर दबाव बनाने का ‘लाइसेंस’ देगी। NATO की एकजुटता कमजोर हो सकती है, क्योंकि अमेरिका यूरोप की सुरक्षा से पीछे हटने का संकेत दे रहा है।

भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि C5 भारत के लिए अवसर है—चीन के साथ संतुलन बनाते हुए वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज। लेकिन जोखिम भी हैं: रूस-चीन गठजोड़ से दूरी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, यह ट्रंप का ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नया अध्याय है, जो वैश्विक गठबंधनों को हिला सकता है। क्या C5 वास्तविकता बनेगा? दुनिया बेसब्री से देख रही है।

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