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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: ट्रायल रन शुरू, फरवरी 2026 में पूर्ण उद्घाटन से बदल जाएगी उत्तर भारत की कनेक्टिविटी!

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: ट्रायल रन शुरू, फरवरी 2026 में पूर्ण उद्घाटन से बदल जाएगी उत्तर भारत की कनेक्टिविटी!

नई दिल्ली: देश के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शुमार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 1 दिसंबर 2025 से शुरू हुए ट्रायल रन में वाहन बिना टोल के इस पर दौड़ रहे हैं, जिससे दिल्ली से देहरादून का 6-6.5 घंटे का सफर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारियों के अनुसार, फरवरी 2026 में इसे पूरी तरह जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह 210 किलोमीटर लंबा 6-लेन (विस्तार योग्य 12-लेन) एक्सप्रेसवे, जिसे दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी कहा जाता है, करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 दिसंबर 2021 को इसकी आधारशिला रखी थी। एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के बागपत, बरौत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर जिले और उत्तराखंड के देहरादून तक फैला है। ट्रायल रन का पहला चरण अक्षरधाम से बागपत (खेकड़ा) तक के 32 किलोमीटर हिस्से पर चल रहा है, जो ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) से जुड़ता है। इस दौरान कोई टोल वसूला नहीं जाएगा, ताकि ट्रैफिक फ्लो, सेफ्टी और सुविधाओं का परीक्षण हो सके। NHAI ने बताया कि अगले चरणों में बागपत-सहारनपुर, सहारनपुर बायपास-गणेशपुर और अंतिम देहरादून तक का काम तेजी से पूरा हो रहा है।

इस एक्सप्रेसवे की खासियतें इसे अत्याधुनिक बनाती हैं। राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए सुरक्षित है – यह भारत का दूसरा ऐसा हाईवे है (NH-44 के बाद), जहां जानवरों के लिए 6 मीटर ऊंचाई का फ्लाईओवर है। इसमें दो-ट्यूब टनल (कुल 2.322 किमी), 4.82 किमी लंबा फ्लाईओवर और 340 मीटर सिंगल-ट्यूब टनल शामिल हैं। हर 500 मीटर पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और 400 से ज्यादा वाटर रिचार्ज पॉइंट्स हैं। इसके अलावा, हरिद्वार स्पर और 14.75 किमी स्ट्रेच पर सोलर पैनल लगाने की योजना है, जो 7 मेगावाट बिजली पैदा करेगा। अधिकतम स्पीड लिमिट 100 किमी/घंटा है, जो ट्रैफिक को कम करेगा।

यह प्रोजेक्ट दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड के बीच नया इकोनॉमिक कॉरिडोर खोलेगा। रियल एस्टेट में बूम की उम्मीद है – बागपत, शामली जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ेगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, खासकर चार धाम यात्रा और हिल स्टेशनों के लिए। लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटेगी, जिससे औद्योगिक विकास होगा। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा के कम्यूटर्स को पहले ही राहत मिल रही है।

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