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12 साल बाद जिंदा लौटा केदारनाथ आपदा का ‘मृत’ शिवम: पुणे के मानसिक अस्पताल से घर पहुंची चमत्कारिक कहानी

12 साल बाद जिंदा लौटा केदारनाथ आपदा का ‘मृत’ शिवम: पुणे के मानसिक अस्पताल से घर पहुंची चमत्कारिक कहानी

16-17 जून 2013 की वह भयावह रात… केदारनाथ में बादल फटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों जिंदगियां छीन लीं। इन्हीं में एक नाम था शिवम का – उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के रहने वाले पोलियो ग्रस्त 17 साल के उस लड़के का, जिसे परिवार ने कई दिन तलाशने के बाद “मृत” मानकर अंतिम संस्कार तक कर दिया था।

लेकिन 12 साल बाद, दिसंबर 2025 में शिवम अपने परिवार के पास वापस लौट आया है – पुणे के क्षेत्रीय मानसिक अस्पताल (Regional Mental Hospital, Yerawada) से। यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं।

कैसे बचा था शिवम?

परिवार के अनुसार, शिवम 2013 में अपने चाचा के साथ केदारनाथ यात्रा पर गया था। बाढ़ आने पर दोनों अलग हो गए। चाचा किसी तरह बचकर लौट आए, लेकिन शिवम का कोई अता-पता नहीं चला। कई दिन इंतज़ार के बाद परिवार ने गंगा में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

दरअसल शिवम उस रात किसी तरह बच तो गया था, लेकिन सदमे और चोटों की वजह से उसे कुछ याद नहीं रहा। वह भटकते-भटकते महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) पहुंच गया और एक मंदिर में रहने लगा।

चोरी का झूठा इल्ज़ाम और मानसिक अस्पताल

2021 में उसी मंदिर में चोरी हुई। असली चोरों ने शिवम का नाम ले दिया। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। कोर्ट में पेशी के दौरान जज ने देखा कि शिवम मानसिक रूप से बीमार हैं (हेबेफ्रेनिक स्किज़ोफ्रेनिया) और बोलते भी सिर्फ पहाड़ी भाषा में हैं। कोर्ट ने उन्हें पुणे के RMH में भर्ती करने का आदेश दिया।

पहाड़ी में बातें, फिर अचानक स्कूल का नाम

अस्पताल में शिवम ज्यादातर चुप रहते थे। जो दो-चार शब्द बोलते, वह गढ़वाली-कुमाऊंनी में। स्टाफ हैरान रहता।

फिर 2023 में एक दिन अचानक शिवम ने कहा – “प्रेम विद्यालय… रुड़की”।

यह सुनते ही अस्पताल की सोशल वर्कर ने तुरंत हरकत में आकर रुड़की पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने प्रेम विद्यालय के पुराने रिकॉर्ड खंगाले – 2012-13 का 12वीं क्लास का छात्र शिवम, पोलियो ग्रस्त, हरिद्वार के गांव भगवानपुर का… सब मैच कर गया।

वीडियो कॉल पर टूट पड़े भाई

जब परिवार को पहली बार वीडियो कॉल पर शिवम दिखाया गया, तो उसका बड़ा भाई फूट-फूट कर रो पड़ा। 12 साल बाद भाई को जिंदा देख पूरा परिवार सदमे में था।

घर वापसी में सबसे बड़ी रुकावट – कोर्ट केस

चोरी का केस अभी भी लटका था। परिवार ने वकील किए, कोर्ट में सबूत दिए कि शिवम तो खुद विक्टिम हैं। आखिरकार 2024 में शिवम को क्लीन चिट मिली, लेकिन अदालत का अंतिम आदेश RMH को पिछले महीने ही मिला।

5 दिसंबर 2025: घर लौटा शिवम

पिछले हफ्ते 5 दिसंबर को शिवम को आखिरकार डिस्चार्ज मिला। अस्पताल स्टाफ ने आंसुओं के साथ विदाई दी। शिवम अब अपने गांव भगवानपुर (हरिद्वार) में परिवार के पास है। अभी भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं है, लेकिन घर की गर्माहट और मां की गोद मिल गई है।

परिवार का कहना है –

“हमने तो गंगा में उसका पिंड तक दे दिया था… लेकिन बाबा केदारनाथ ने हमारा बेटा 12 साल बाद लौटा दिया। यह कोई चमत्कार से कम नहीं।”

यह कहानी 2013 केदारनाथ त्रासदी में लापता हुए सैकड़ों लोगों की याद फिर से ताज़ा कर गई है। कई परिवार आज भी अपने अपनों का इंतज़ार कर रहे हैं। शिवम की घर वापसी उन्हें भी उम्मीद की एक किरण दे रही है।

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