उत्तराखंड

धराली आपदा पर कांग्रेस का तीखा हमला: गणेश गोदियाल ने सरकार के दावों को बताया झूठा, राज्यपाल को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

धराली आपदा पर कांग्रेस का तीखा हमला: गणेश गोदियाल ने सरकार के दावों को बताया झूठा, राज्यपाल को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में पार्टी का प्रतिनिधिमंडल धराली आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर लौट आया है। कांग्रेस भवन देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता में गोदियाल ने सरकार के राहत कार्यों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आधिकारिक दावे हकीकत से कोसों दूर हैं। प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल का जायजा लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसे जल्द राज्यपाल को सौंपा जाएगा। गोदियाल ने मृतकों की संख्या में विरोधाभास पर भी सरकार को घेरा, और पीड़ितों के लिए तत्काल राहत की मांग की।

गोदियाल ने आरोप लगाया कि 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में बादल फटने से आई विनाशकारी आपदा के चार महीने बाद भी राज्य सरकार ने पुनर्वास, पुनर्निर्माण या विस्थापन के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा, “सरकार के दावे खोखले हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने 67 लोगों को मृत या लापता बताया, जबकि राज्य मंत्री कर्नल अजय कोठियाल ने एक बैठक में 147 लोगों के मलबे में दबे होने की बात कही। अब सरकार 52 लोगों को गायब या मृत बता रही है। यह विरोधाभास जनता और विपक्ष को भ्रमित कर रहा है।” गोदियाल ने जोर देकर कहा कि आपदा राहत मानवीय मुद्दा है, राजनीति का नहीं। सरकार को तुरंत स्पष्टता लानी चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट के अनुसार, 250 नाली भूमि पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। 112 आवासीय मकान और 70 होटल-रिजॉर्ट-होमस्टे बुरी तरह प्रभावित हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों में केवल कुछ को ही मुआवजा मिला। गोदियाल ने बताया कि मलबे में दबे शवों को निकालने के लिए भी पर्याप्त प्रयास नहीं हुए। एक महिला ने मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली, बाजार तबाह हो गए, और सेब-राजमा-आलू उत्पादकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। 112 पीड़ितों को 5-5 लाख की सहायता दी गई, लेकिन 38 को ‘मकान पूरी तरह नष्ट न होने’ का बहाना बनाकर वंचित रखा गया। हकीकत में, बचे मकान भी क्षतिग्रस्त हैं, और पीड़ितों को खुद के खर्चे पर मलबा हटाना पड़ रहा है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें केदारनाथ आपदा (2013) की तर्ज पर हैं: पीड़ितों को क्षति का स्व-निर्धारण का अधिकार दें, मुआवजा उसी आधार पर बांटें। होटल-ढाबा संचालकों के रजिस्ट्रेशन की बहानेबाजी बंद करें—जो भी वहां काम कर रहा था, उसे राहत दें। मलबा साफ कर बची जमीन पर ही पुनर्स्थापना करें, विस्थापन वहीं करें। गोदियाल ने कहा, “धराली के निवासियों की कोई सुध लेने वाला नहीं। सरकार की लापरवाही से मानवीय त्रासदी बढ़ रही है।”

यह दौरा कांग्रेस के हालिया संगठनात्मक बदलाव के बाद आया, जहां गोदियाल को दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। विपक्ष का यह कदम राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है, खासकर जब संसदीय समिति भी धराली आपदा के कारणों की जांच कर रही है। क्या सरकार रिपोर्ट पर कार्रवाई करेगी? राजनीतिक हलचल तेज हो रही है।

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