कोलकाता कोर्ट का कड़ा फैसला: JMB के 5 दहशतगर्दों को उम्रकैद, 2016 की बम ब्लास्ट साजिश का खुलासा!
कोलकाता कोर्ट का कड़ा फैसला: JMB के 5 दहशतगर्दों को उम्रकैद, 2016 की बम ब्लास्ट साजिश का खुलासा!
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की सिटी सेशंस कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) को। 2016 में भारत के कई राज्यों में बम धमाकों की साजिश रचने वाले पांच आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। स्पेशल जज रोहन सिन्हा ने छह में से पांच को दोषी ठहराया, जबकि एक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की लंबी जांच का नतीजा है, जो 2014 के खग्रागढ़ ब्लास्ट से जुड़ा है।
दोषी करार दिए गए आतंकी हैं: अनवर हुसैन फारूक उर्फ एनाम (38), मोहम्मद रुबेल उर्फ रफीक (26) – दोनों बांग्लादेश के जमालपुर जिले के; मौलाना यूसुफ शेख उर्फ अबू बक्कर (31) – बुरदवान के; मोहम्मद शाहिदुल इस्लाम उर्फ सामीम (22) और जबीरुल इस्लाम (30) – दोनों असम के बोरबेटा के। इन पर आईपीसी की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र), 121 (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 121A (षड्यंत्र), 122, 123, 124A (राजद्रोह), फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 (अवैध प्रवेश) और एक्सप्लोसिव सबस्टांस एक्ट के तहत मुकदमा चला। मौलाना यूसुफ को धारा 121A के तहत अतिरिक्त उम्रकैद मिली। छठे आरोपी अब्दुल कलाम को बरी किया गया।
यह केस 2014 के खग्रागढ़ ब्लास्ट से शुरू होता है। 2 अक्टूबर 2014 को पूर्वी बुरदवान जिले के खग्रागढ़ में एक किराए के मकान में आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के दौरान जोरदार धमाका हुआ। शकील गाजी नामक एक आतंकी की मौके पर मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल था। शुरुआती जांच में JMB का हाथ सामने आया, जो बांग्लादेश से संचालित होकर भारत में दहशत फैलाने की कोशिश कर रहा था। दो साल बाद, सितंबर 2016 में, इंटेलिजेंस इनपुट्स पर STF ने नॉर्थ 24 परगना बॉर्डर से अवैध घुसपैठ करने वाले इन छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया। उनके पास नकली भारतीय दस्तावेज, विस्फोटक सामग्री और आईईडी के पुर्जे बरामद हुए।
जांच में खुलासा हुआ कि JMB का मॉड्यूल भारत के पूर्वोत्तर, दक्षिणी राज्यों और अन्य हिस्सों में बम ब्लास्ट्स की साजिश रच रहा था। इनका मकसद देश को अस्थिर करना और ‘इस्लामिक स्टेट’ की तर्ज पर कट्टरपंथ फैलाना था। आरोपी युवाओं को भर्ती कर ट्रेनिंग दे रहे थे, हथियार जुटा रहे थे और फंडिंग के लिए हुंडी सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे थे। STF ने कहा कि यह गिरोह 2014 के ब्लास्ट से सीधे जुड़ा था, जहां विस्फोटक बनाने की फैक्ट्री चल रही थी। गिरफ्तारी के समय इनके पास बम बनाने की सामग्री मिली, जो कई शहरों में हमलों के लिए तैयार की जा रही थी।
STF के एक अधिकारी ने बताया, “ये आतंकी बांग्लादेश से घुसकर नेटवर्क बना रहे थे। हमारी निगरानी और रेड्स ने साजिश को कुचल दिया।” JMB, जो 2005 में बांग्लादेश में बैन है, भारत में भी यूएपीए के तहत प्रतिबंधित है। यह संगठन ISIS से प्रेरित होकर कई हमलों की साजिशें रच चुका है, जैसे 2018 का बोध गया ब्लास्ट। कोर्ट के इस फैसले से JMB का भारत-विरोधी नेटवर्क कमजोर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा और इंटेलिजेंस को और मजबूत करने की जरूरत है। अब अपील का रास्ता खुला है, लेकिन यह सजा आतंक के खिलाफ भारत की दृढ़ता का प्रतीक बनेगी।
