राजनीति

AAP नेता अवध ओझा का राजनीति से संन्यास: 10 महीने पहले हार के बाद अलविदा, केजरीवाल को बताया ‘महान नेता’

AAP नेता अवध ओझा का राजनीति से संन्यास: 10 महीने पहले हार के बाद अलविदा, केजरीवाल को बताया ‘महान नेता’

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और प्रसिद्ध UPSC कोचिंग टीचर अवध ओझा ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सीट से हार के करीब 10 महीने बाद उन्होंने सोमवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट शेयर कर यह फैसला सुनाया। ओझा ने AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को “बहुत महान नेता” बताते हुए धन्यवाद दिया, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती ने इसे “नॉट डन” करार देते हुए नाराजगी जताई। यह संन्यास AAP के लिए झटका माना जा रहा है, खासकर शिक्षा सुधारों पर फोकस वाली पार्टी में।

ओझा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “आदरणीय अरविंद जी, मनीष जी, संजय जी, सभी AAP के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, नेता आदि—आप सभी का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद। जो प्रेम और सम्मान आपने दिया, उसका ऋणी रहूंगा। राजनीति से संन्यास मेरा व्यक्तिगत निर्णय है। अरविंद जी, आप एक बहुत महान नेता हैं। जय हिंद।” उन्होंने पटपड़गंज के निवासियों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें “बहुत प्यार” दिया। ओझा का यह कदम उनकी पहली राजनीतिक पारी के बाद आया, जो महज कुछ महीनों की रही।

ओझा, जो सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स वाले मोटिवेशनल स्पीकर हैं, ने दिसंबर 2024 में AAP जॉइन किया था। पार्टी ने उन्हें पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की पटपड़गंज सीट पर टिकट दिया, जहां वे BJP के रविंदर सिंह नेगी से 28,000 से ज्यादा वोटों से हार गए। जॉइनिंग के समय ओझा ने कहा था, “शिक्षा सुधार मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है। AAP बच्चों के भविष्य पर फोकस करती है।” केजरीवाल ने उन्हें वेलकम करते हुए कहा था, “ओझा जी ने लाखों युवाओं को अच्छी शिक्षा देकर रोजगार योग्य बनाया। उनकी मौजूदगी से पार्टी की शिक्षा पहल मजबूत होगी।”

ओझा का संन्यास AAP के लिए असहज साबित हो रहा है। सोमनाथ भारती ने एक्स पर रिएक्ट करते हुए लिखा, “मुझे आपका व्यक्तिगत सम्मान है, लेकिन राजनीति कोई शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट नहीं है। पार्टी ने आपको टिकट दिया था, उम्मीद थी कि हार-जीत के बाद भी AAP के साथ काम करेंगे।” भारती ने जोर दिया कि राजनीति समर्पण मांगती है, न कि जल्दबाजी का। AAP के अन्य नेता चुप हैं, लेकिन सोर्स बताते हैं कि पार्टी आंतरिक समीक्षा कर रही है। विपक्ष ने इसे AAP की “आंतरिक कलह” बताया, जबकि BJP ने तंज कसा, “केजरीवाल का ‘महान’ नेतृत्व ही लोगों को भगा रहा है।”

ओझा का राजनीतिक सफर छोटा लेकिन चर्चित रहा। UPSC कोच के रूप में वे “ओझा सर” के नाम से मशहूर हैं, और उनकी गीता पर लेक्चर्स लाखों व्यूज पाते हैं। राजनीति में आने का मकसद शिक्षा सुधार था, लेकिन हार ने उन्हें निराश किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संन्यास AAP की युवा नेतृत्व भर्ती रणनीति पर सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर #AvadhOjhaRetires ट्रेंड कर रहा, जहां फैंस उन्हें “शिक्षा योद्धा” बता रहे। ओझा ने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत फैसला है, लेकिन क्या वे पूरी तरह लौटेंगे या पीछे से सलाह देंगे—यह सस्पेंस बरकरार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *