सभी स्मार्टफोन्स में प्री-इंस्टॉल होगा ‘संचार साथी’ ऐप: डिलीट नहीं कर पाएंगे, चोरी-ठगी रोकेगा!
सभी स्मार्टफोन्स में प्री-इंस्टॉल होगा ‘संचार साथी’ ऐप: डिलीट नहीं कर पाएंगे, चोरी-ठगी रोकेगा!
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बड़ी खबर! भारत सरकार ने टेलीकॉम विभाग (DoT) के जरिए एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत देश में बिकने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) ऐप प्री-इंस्टॉल होना अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात – इस ऐप को यूजर्स चाहकर भी डिलीट या डिसेबल नहीं कर पाएंगे! यह ऐप साइबर ठगी, मोबाइल चोरी और फर्जी सिम कार्ड्स से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। DoT के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से लागू इस नियम से करोड़ों यूजर्स की सुरक्षा मजबूत होगी।
संचार साथी पोर्टल, जो पहले वेबसाइट के रूप में 2021 में लॉन्च हुआ था, अब ऐप फॉर्म में आ रहा है। यह ऐप CEIR (Central Equipment Identity Register) सिस्टम से जुड़ा होगा, जो चोरी या खोए फोन को ब्लॉक करने का काम करता है। ऐप के मुख्य फीचर्स:
IMEI ब्लॉकिंग: फोन खोने या चोरी होने पर IMEI नंबर एंटर कर तुरंत ब्लॉक करें। इससे फोन किसी नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो पाएगा।
सिम चेक: आपके नाम पर कितने सिम कार्ड रजिस्टर्ड हैं, यह चेक करें। फर्जी सिम्स को रिपोर्ट करें।
ठगी अलर्ट: साइबर फ्रॉड केसेज पर रीयल-टाइम अलर्ट और रिपोर्टिंग।
रिपोर्ट कार्ड: आपके फोन का पूरा ‘रिपोर्ट कार्ड’ देखें – लोकेशन, उपयोग इतिहास और सुरक्षा स्टेटस।
DoT के आदेश में साफ कहा गया है कि सैमसंग, एप्पल, वनप्लस, शाओमी जैसी सभी कंपनियों को नए फोन्स में यह ऐप फैक्ट्री-लेवल पर इंस्टॉल करना होगा। एप्पल के iOS पर थोड़ी चुनौती है, क्योंकि उनकी पॉलिसी थर्ड-पार्टी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल करने की इजाजत नहीं देती। लेकिन DoT ने कहा कि ऐपल को भी वैकल्पिक तरीके से (जैसे सिस्टम इंटीग्रेशन) लागू करना होगा। पुराने फोन्स के लिए ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप स्टोर पर उपलब्ध होगा, लेकिन नए डिवाइसेस में यह अनिवार्य है।
यह कदम साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं के बीच आया है। 2025 में ही 50,000 से ज्यादा चोरी फोन CEIR के जरिए रिकवर हो चुके हैं। DoT सचिव ने कहा, “यह ऐप यूजर्स को सशक्त बनाएगा। ठगी और चोरी से सालाना अरबों का नुकसान होता है, इसे रोकना जरूरी।” लेकिन प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स ने सवाल उठाए – “सरकारी ऐप हमेशा ऑन रहेगा, तो डेटा सिक्योरिटी का क्या?” सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐप में एन्क्रिप्टेड डेटा यूज होगा और केवल यूजर की सहमति से काम करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगा, लेकिन कंपनियों को जल्द अनुपालन करना होगा। अगर आप नया फोन खरीदने वाले हैं, तो तैयार रहें – यह ऐप आपके फोन का ‘गार्डियन’ बनेगा! क्या यह सिक्योरिटी बढ़ाएगा या प्राइवेसी पर सवाल खड़े करेगा? यूजर्स की राय बंटी हुई है।
