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रूस-भारत सैन्य सहयोग मजबूत करने के लिए पुतिन से ठीक पहले आई रूसी सेना की चार सदस्यीय टीम

रूस-भारत सैन्य सहयोग मजबूत करने के लिए पुतिन से ठीक पहले आई रूसी सेना की चार सदस्यीय टीम

नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले रूसी सेना की एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय टीम ने भारत का दौरा किया। यह दौरा दोनों देशों के बीच सैन्य और रक्षा सहयोग को नई गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रूसी टीम, जिसमें रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और सैन्य विशेषज्ञ शामिल थे, ने भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, हथियारों की आपूर्ति और संयुक्त तकनीकी विकास पर जोर देना था।

रूसी टीम का यह दौरा 28 नवंबर को मॉस्को में आयोजित भारत-रूस सैन्य सहयोग कार्य समूह की चौथी बैठक के ठीक बाद हुआ, जहां दोनों पक्षों ने रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति जताई। टीम ने नई दिल्ली में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेना प्रमुख जनरल उद्धम सिंह के साथ बैठक की। चर्चा का मुख्य फोकस रूसी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई-57ई के संयुक्त उत्पादन और ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नत संस्करण पर रहा। रूस ने भारत को पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप है। इसके अलावा, ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

यह यात्रा पुतिन की दिसंबर में होने वाली भारत यात्रा की पूर्वसंध्या पर आई है, जहां 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा और आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की हालिया यात्रा के बाद यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों को दर्शाता है। यूक्रेन संकट के बीच भी भारत-रूस संबंध मजबूत बने हुए हैं, जहां भारत रूस से तेल आयात का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है। रूसी अधिकारियों ने कहा कि यह टीम का दौरा पुतिन की यात्रा के लिए आधार तैयार करने वाला है, जिसमें लॉजिस्टिक्स सहयोग और सैन्य अड्डों तक पारस्परिक पहुंच जैसे मुद्दे प्रमुख होंगे।

भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाएगा, खासकर चीन के साथ सीमा तनाव के संदर्भ में। रूस ने भारत को स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और डीएमआईसी कॉरिडोर में भागीदारी का भी आश्वासन दिया। कुल मिलाकर, यह दौरा भारत-रूस साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत है, जो वैश्विक भू-राजनीति में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत करेगा।

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