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शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल: 14 महीनों के बाद सेंसेक्स-निफ्टी ने रचा नया कीर्तिमान

शेयर बाजार में ऐतिहासिक उछाल: 14 महीनों के बाद सेंसेक्स-निफ्टी ने रचा नया कीर्तिमान

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को इतिहास रच दिया, जब बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों ने 14 महीनों के लंबे इंतजार के बाद अपने नए रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ। सेंसेक्स 416.67 अंकों की तेजी के साथ 86,026.18 के स्तर पर पहुंचा, जो सितंबर 27, 2024 के पिछले रिकॉर्ड 85,978.25 से आगे है। वहीं, निफ्टी 101.65 अंकों की बढ़त के साथ 26,306.95 की नई ऊंचाई हासिल की। यह उछाल वैश्विक बाजारों की सकारात्मक धारा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदों और विदेशी निवेशकों के भारी प्रवाह से प्रेरित है।

बुधवार को ही सेंसेक्स 1,022.50 अंकों या 1.21 प्रतिशत की छलांग लगाकर 85,609.51 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 320.50 अंकों या 1.24 प्रतिशत ऊपर 26,205.30 पर समाप्त हुआ। गुरुवार की सुबह के सत्र में बाजार ने इस गति को बरकरार रखा, लेकिन दोपहर होते-होते लाभ-बुकिंग के दबाव में सेंसेक्स 111 अंकों की बढ़त के साथ 85,720.38 पर बंद हुआ। निफ्टी मामूली 0.04 प्रतिशत की तेजी के साथ 26,215.55 पर समाप्त हुआ। फिर भी, इन्ट्राडे में दोनों सूचकांकों ने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जो निवेशकों में उत्साह का संचार कर रहा है।

इस रैली के पीछे मुख्य कारण अमेरिकी बाजारों का मजबूत प्रदर्शन है, जहां टेक्नोलॉजी सेक्टर की अगुआई में डाउ जोंस और नैस्डैक में उछाल आया। फेड की दिसंबर में ब्याज दरें घटाने की 90 प्रतिशत संभावना ने वैश्विक धन प्रवाह को बढ़ावा दिया। भारत में आरबीआई की अगले सप्ताह ब्याज दर कटौती की उम्मीद ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर को पंख दिए। निफ्टी बैंक इंडेक्स ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। महिंद्रा एंड महिंद्रा, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक और एचयूएल जैसे शेयरों में 1-2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जबकि पावर ग्रिड, भारती एयरटेल और इंफोसिस में गिरावट आई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकॉर्ड ब्रेकिंग बाजार की मजबूत बुनियाद को दर्शाता है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “निफ्टी की 320 अंकों की रैली के बाद बाजार बुलिश मोड में आ गया है। नए रिकॉर्ड बनना समय की बात मात्र है।” हालांकि, म्यूचुअल फंड निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि सेंसेक्स की 17 प्रतिशत की सात माह की तेजी के बावजूद, केवल 25 प्रतिशत शेयर ही इस रैली का नेतृत्व कर रहे हैं। आईटी और फार्मा सेक्टर अभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से प्रभावित हैं। लार्ज-कैप के अलावा मिड और स्मॉल-कैप में मूल्यांकन जोखिम बरकरार है।

नवंबर माह में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आरबीआई की डोविश नीति, मुद्रास्फीति में नरमी और खाद्य कीमतों में कमी से विकास को समर्थन मिलेगा। लेकिन, रूस-यूक्रेन शांति समझौते जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं पर नजर रखनी होगी। कुल मिलाकर, यह रिकॉर्ड भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन को रेखांकित करता है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच भी चमक रहा है। निवेशक सतर्क रहें, लेकिन लंबी अवधि के लिए अवसरों का फायदा उठाएं।

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