राष्ट्रीय

घुसपैठियों को आधार कार्ड: क्या मिले वोट का अधिकार? SIR पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

घुसपैठियों को आधार कार्ड: क्या मिले वोट का अधिकार? SIR पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सुनवाई के दौरान एक गंभीर सवाल उठाया—क्या पड़ोसी देशों से घुसकर आए ‘घुसपैठियों’ को सिर्फ आधार कार्ड के दम पर वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए? मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि आधार सामाजिक कल्याण लाभों के लिए है, न कि नागरिकता या मताधिकार का प्रमाण। यह टिप्पणी कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बहस के बीच आई, जहां विपक्ष ने इसे ‘मतदाता हटाने की साजिश’ बताया है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (केरल व पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि) ने दलील दी कि SIR प्रक्रिया लोगों पर बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा, “सेल्फ-डिक्लेरेशन है—मैं नागरिक हूं, यहां रहता हूं। आधार कार्ड निवास का प्रमाण है। नाम हटाना हो तो निष्पक्ष प्रक्रिया से हो।” सिब्बल ने जोर दिया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने पर वैधता की धारणा बनती है, जब तक राज्य साबित न करे। लेकिन सीजेआई सूर्य कांत ने तुरंत पलटवार किया: “मान लीजिए कोई पड़ोसी देश से घुस आता है, यहां रिक्शा चलाता या मजदूरी करता है। हमारी संवैधानिक नैतिकता के तहत सब्सिडी वाले राशन के लिए आधार देना ठीक है, लेकिन क्या इसलिए उसे वोटर बना दें?”

बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी सहमति जताई कि आधार ‘पूर्ण नागरिकता का प्रमाण’ नहीं है। उन्होंने कहा, “आधार को SIR के लिए सिर्फ 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है। चुनाव आयोग (ECI) फॉर्म-6 के दस्तावेजों की जांच कर सकता है—यह कोई ‘पोस्ट ऑफिस’ नहीं जो सब कुछ बिना जांच स्वीकार कर ले।” कोर्ट ने मृत वोटरों को लिस्ट से हटाने की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि सूचियां पंचायतों व वेबसाइट पर सार्वजनिक हैं। सिब्बल ने BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर्स) की हालिया मौतों का जिक्र किया, लेकिन बेंच ने इसे ‘निष्कर्षहीन’ बताया।

यह विवाद कई राज्यों—बिहार, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल—में SIR से भड़का। विपक्ष का आरोप है कि BJP-ECI मिलकर गरीबों व अल्पसंख्यकों के नाम काट रही है, जबकि सरकार इसे ‘डुप्लीकेट व फर्जी वोटरों’ को साफ करने का कदम बता रही है। सुप्रीम कोर्ट ने ECI को काउंटर-अफिडेविट दाखिल करने का आदेश दिया। तमिलनाडु याचिका पर 4 दिसंबर, पश्चिम बंगाल पर 9 दिसंबर को सुनवाई होगी। केरल SIR पर भी नोटिस जारी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सवाल नागरिकता संशोधन कानून (CAA) व NRC बहस को हवा देगा। आधार को वोटर सत्यापन के लिए वैकल्पिक दस्तावेज बनाने का पुराना आदेश (सितंबर 2025) अब चुनौती में है। क्या SIR प्रक्रिया रुकेगी या सख्त होगी? अगली सुनवाई में साफ होगा, लेकिन कोर्ट की यह टिप्पणी लोकतंत्र की अखंडता पर सवाल चिह्नित करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *