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भोपाल में साइबर ठगों का खौफ: फर्जी आतंकी फंडिंग धमकी से डरे वरिष्ठ वकील ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘देशद्रोही कहलाना बर्दाश्त नहीं’

भोपाल में साइबर ठगों का खौफ: फर्जी आतंकी फंडिंग धमकी से डरे वरिष्ठ वकील ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘देशद्रोही कहलाना बर्दाश्त नहीं’

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर अपराध का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के बरखेड़ी इलाके में रहने वाले 68 वर्षीय वरिष्ठ एडवोकेट शिवकुमार वर्मा ने फर्जी ‘आतंकी फंडिंग’ की धमकी से घबराकर मंगलवार रात करीब 7:30 बजे अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें वर्मा ने साफ लिखा कि वे ‘देशद्रोही’ कहलाने की बदनामी बर्दाश्त नहीं कर पाए। यह घटना डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों की भयावहता को उजागर करती है।

शिवकुमार वर्मा भोपाल जिला कोर्ट में लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहे थे। परिजनों के मुताबिक, कुछ दिनों पहले उन्हें एक अज्ञात नंबर से फोन कॉल आया। कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा, “दिल्ली ब्लास्ट में तुम्हारा नाम फंस गया है। तुम्हारे नाम से HDFC बैंक में फर्जी खाता खोला गया है, जिसका इस्तेमाल पहलगाम आतंकी आसिफ की फंडिंग के लिए हुआ। अगर पैसे नहीं दिए तो गिरफ्तारी होगी और देशद्रोही घोषित कर देंगे।” इस धमकी ने वर्मा को इतना आहत किया कि वे तनाव में डूब गए। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा, “मैं अपनी मर्जी से यह कदम उठा रहा हूं। मेरी पुरानी सेवाओं को भूलकर मुझे आतंकी फंडिंग में फंसाने की कोशिश की गई। 1984 के भोपाल गैस त्रासदी में मैंने सैकड़ों मृतकों का अंतिम संस्कार कराया था, लेकिन अब यह कलंक सहन नहीं हो रहा।”

पुलिस ने बताया कि वर्मा को अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जहांगीराबाद थाने के एसएचओ ने कहा, “घटना के ठीक पहले एक संदिग्ध नंबर से कॉल रिकॉर्ड हुई है। हम सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) स्कैनिंग कर रहे हैं। यह साइबर ठगों का नया मॉड्यूल लगता है, जहां वे थाना या कोर्ट के नाम पर डराते हैं।” साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है और संदिग्ध नंबर को ट्रैक करने के लिए दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया गया है, क्योंकि धमकी में दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र था। वर्मा के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जो सदमे में हैं।

यह मामला देशभर में फैल रहे साइबर ठगी के पैटर्न को दर्शाता है। हाल ही में 3 नवंबर को भोपाल के कोहेफिजा में एक अन्य वकील को पुलवामा फंडिंग के नाम पर धमकाया गया, जबकि 20 नवंबर को शाहपुरा में एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर से 68 लाख रुपये ठगे गए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोग तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह भोपाल में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी पहली आत्महत्या है। दैनिक भास्कर ने बताया कि ठगों ने वर्मा को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में फंसाने की कोशिश की, लेकिन डर के मारे उन्होंने जान दे दी।

पुलिस ने शव का पीएम कराया और सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। एसपी साउथ भोपाल ने कहा, “हम साइबर क्राइम के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। जनता को सतर्क रहने की सलाह है।” यह घटना समाज को झकझोर रही है—क्या कानून की जानकारी होने के बावजूद डर इतना घना हो सकता है? वर्मा की मौत न सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि साइबर सुरक्षा की कमजोरियों का आईना भी। उम्मीद है कि जांच से ठगों को जल्द सजा मिलेगी।

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