अयोध्या: रामलला के शिखर पर फहरा भगवा धर्मध्वज, 500 साल की तपस्या का साकार रूप, जानिये इसका महत्व
विवाह पंचमी के पावन पर्व पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के 161 फीट ऊंचे मुख्य शिखर पर भगवा धर्मध्वज फहराया गया। ठीक अभिजीत मुहूर्त (11:55 से 12:39 बजे तक) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रिमोट के माध्यम से 36×54 फीट का विशाल केसरिया ध्वज लहराया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और “जय श्री राम” के उद्घोषों के बीच यह ऐतिहासिक क्षण संपन्न हुआ। यह ध्वजारोहण केवल एक समारोह नहीं, बल्कि मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया की पूर्णाहुति और सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक है।
ध्वज का आकार, वजन और बनावट
आकार: 36 फीट चौड़ाई × 54 फीट लंबाई (लगभग 1944 वर्ग फीट)
वजन: करीब 701 किलोग्राम
कपड़ा: शुद्ध खादी, जिसे बनारस के कुशल कारीगरों ने तैयार किया
डिजाइन: बीच में सुनहरा “ॐ”, चारों कोनों पर कोविदार वृक्ष (रामवंश का प्रतीक), ऊपर-नीचे “जय श्री राम” और “राम राज्य” अंकित
रंग: केसरिया – त्याग, बलिदान और संन्यास का प्रतीक
ध्वजदंड की खासियत
ऊंचाई: 108 फीट (लगभग 33 मीटर)
सामग्री: स्टेनलेस स्टील, ऊपर 24 कैरेट सोने का कलश
कुल ऊंचाई (शिखर सहित): 191 फीट – भारत का सबसे ऊंचा मंदिर ध्वजदंड
भार क्षमता: 1000 किलोग्राम से अधिक
ध्वज का धार्मिक और शास्त्रीय महत्व
हिंदू शास्त्रों में किसी मंदिर का निर्माण तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उस पर धर्मध्वज न फहराया जाए।
गरुड़ पुराण और अग्नि पुराण में लिखा है कि जहाँ धर्मध्वज लहराता है, वहाँ भगवान का साक्षात् निवास होता है।
भगवा रंग सूर्य का प्रतीक है, जो अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाता है।
“ॐ” समस्त सृष्टि की प्रथम ध्वनि है, जबकि कोविदार वृक्ष रघुकुल की महिमा का प्रतीक है।
ध्वज की छाया जिस भूमि पर पड़ती है, वह पवित्र मानी जाती है। दूर से दर्शन करने वाले को भी मंदिर दर्शन का पुण्य मिलता है।
44 मिनट का मुहूर्त क्यों चुना गया?
25 नवंबर को अभिजीत मुहूर्त स्वतः दोपहर में बन रहा था। काशी के ज्योतिषाचार्यों ने 11:55 से 12:39 बजे तक का 44 मिनट का समय चुना क्योंकि:
मंगलवार + पुष्य नक्षत्र + कन्या लग्न
सूर्य ठीक मंदिर के ऊपर (सूर्य अभिषेक काल)
राहु-केतु का प्रभाव नगण्य
ठीक उसी समय रामलला पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ रही थीं – जो राम जन्म के समय की याद दिलाता है।
समारोह में कौन-कौन मौजूद था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
RSS सरसंघचालक मोहन भागवत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय
अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, सचिन तेंदुलकर, आलिया भट्ट, रजनीकांत, कमल हासन सहित 10,000 से अधिक गणमान्य व्यक्ति
40 प्राइवेट जेट्स से मेहमान पहुंचे
नेताओं ने क्या कहा?
पीएम मोदी:
“यह धर्मध्वज केवल कपड़ा नहीं, बल्कि 500 वर्षों की तपस्या का प्रतीक है। सदियों के घाव भर रहे हैं। यह संकल्प से सिद्धि की यात्रा है।”
मोहन भागवत:
“आज बलिदान देने वालों की आत्मा तृप्त हुई होगी। ध्वजारोहण के बाद मंदिर निर्माण की शास्त्रीय प्रक्रिया पूरी हो गई।”
सीएम योगी:
“यह एक यज्ञ की पूर्णाहुति नहीं, बल्कि रामराज्य का शुभारंभ है। अयोध्या अब संघर्षभूमि से उत्सवभूमि बन चुकी है।”
अब आगे क्या?
26 नवंबर से आम दर्शनार्थी फिर से सामान्य रूप से दर्शन कर सकेंगे।
2026 में मंदिर के सभी 18 द्वार खुल जाएंगे।
मंदिर परिसर में 70 एकड़ में बनने वाला विशाल उद्यान और रामायण थीम पार्क भी जल्द पूरा होगा।
यह धर्मध्वज केवल एक कपड़ा नहीं है – यह उन लाखों रामभक्तों का प्रतीक है जिन्होंने 500 वर्षों तक “राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे” का संकल्प दोहराया। आज जब वह केसरिया ध्वज 191 फीट ऊंचे शिखर पर लहरा रहा है, तो पूरे विश्व को संदेश दे रहा है –
