NCERT किताबों में इतिहास का नया अध्याय: अकबर-टीपू को ‘ग्रेट’ का तमगा अलविदा, RSS ने सराहा, कांग्रेस ने किया विरोध
NCERT किताबों में इतिहास का नया अध्याय: अकबर-टीपू को ‘ग्रेट’ का तमगा अलविदा, RSS ने सराहा, कांग्रेस ने किया विरोध
स्कूली पाठ्यक्रम में एक बड़ा बदलाव आया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने इतिहास की किताबों से मुगल सम्राट अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम के आगे लगने वाले ‘ग्रेट’ (महान) शब्द को हटा दिया है। यह संशोधन 11 कक्षाओं की किताबों में किया गया है, जबकि कक्षा 9, 10 और 12 की नई किताबें 2026 में जारी होंगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने इसे ‘सकारात्मक कदम’ बताया है, लेकिन विपक्ष ने ‘इतिहास के विकृतिकरण’ का आरोप लगाया है। यह बदलाव 22 नवंबर 2025 को सामने आया, जब RSS नेता सुनील अंबेकर ने इसे सार्वजनिक रूप से स्वागत किया।
बदलाव का विवरण:
NCERT के नए संस्करण में अब ‘अकबर द ग्रेट’ या ‘टीपू सुल्तान द ग्रेट’ जैसे वाक्यांशों का इस्तेमाल नहीं होगा। अंबेकर ने कहा, “इतिहास की किताबों में कई अच्छे बदलाव हुए हैं। अकबर और टीपू को ‘ग्रेट’ नहीं कहा जाएगा, लेकिन किसी को भी किताबों से हटाया नहीं गया। नई पीढ़ी को उनके क्रूर कृत्यों के बारे में जानना चाहिए, ताकि वे समझें कि हम किसके शिकार हुए और किससे मुक्त होना चाहिए।” वीएचपी के विनोद बंसल ने कहा, “अकबर को महान कैसे कहा जा सकता है, जब महाराणा प्रताप जैसे वीरों को नजरअंदाज किया जाता है? मुगलों की महिमामंडन अब स्वीकार्य नहीं।”
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे ‘बहुत अच्छा कदम’ बताते हुए विवादास्पद बयान दिया: “टीपू-इपु को मारो एकदम… समुद्र में फेंक दो।” उन्होंने कहा, “अगर NCERT ने यह किया है, तो धन्यवाद। ऐसे सुधार जरूरी थे।” X (पूर्व ट्विटर) पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने #NCERTChanges और #AkbarTipu जैसे हैशटैग से बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
कांग्रेस का विरोध: नेता के. मुरलीधरन ने कहा, “अकबर सांप्रदायिक सद्भाव के राजा थे, उन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार किया और हिंदुओं को स्वतंत्रता दी। टीपू ने अंग्रेजों से लड़ा, इसलिए उनकी हत्या हुई। दोनों महान प्रशासक थे। शिवाजी भी महान थे, लेकिन सरकार का यह रवैया गलत है।” कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि मुगलों के शासन में भारत का जीडीपी 27% था, लेकिन तथ्य-जांच में यह गलत साबित हुआ—मुगल शासन 330 वर्षों का था, न कि 700।
बीजेपी का समर्थन: सरकार ने इसे ‘इतिहास सुधार’ बताया, जबकि विपक्ष ने ‘सांप्रदायिक एजेंडा’ का आरोप लगाया।
यह बदलाव NEP 2020 के तहत चल रहे पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा है, जो ‘भारतीय दृष्टिकोण’ पर जोर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों को संतुलित इतिहास मिलेगा, लेकिन विवाद बढ़ सकता है। अधिक जानकारी के लिए NCERT की वेबसाइट चेक करें।
