देहरादून में ऑपरेशन कालनेमि: बांग्लादेशी युवक के फर्जी दस्तावेज पूर्व पति के नाम से, पत्नी बनकर रह रही भारतीय महिला गिरफ्तार
देहरादून में ऑपरेशन कालनेमि: बांग्लादेशी युवक के फर्जी दस्तावेज पूर्व पति के नाम से, पत्नी बनकर रह रही भारतीय महिला गिरफ्तार
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत देहरादून पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की। नेहरू कॉलोनी थाना और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) की टीम ने अवैध रूप से भारत में घुसपैठ कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे बांग्लादेशी युवक मामून हसन और त्यूनी निवासी भारतीय महिला रीना चौहान को गिरफ्तार किया। मामून ने खुद को ‘सचिन चौहान’ बताकर देहरादून क्लब में बाउंसर का काम कर रहा था, जबकि रीना ने अपने पूर्व पति के नाम पर उसके फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। दोनों पर धोखाधड़ी, जालसाजी, विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस को 20 नवंबर को गुप्त सूचना मिली कि नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में एक जोड़े के संदिग्ध रूप से रहने की जानकारी मिली। छापेमारी में मामून हसन (25 वर्ष) और रीना चौहान (28 वर्ष) को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में मामून ने कबूल किया कि वह बांग्लादेश के ढाका जिले का निवासी है और 2023 में अवैध रूप से भारत की सीमा पार कर आया था। फेसबुक पर रीना से ‘वर्चुअल प्यार’ के बाद वह त्यूनी आया, जहां रीना ने अपने पूर्व पति के नाम ‘सचिन चौहान’ का इस्तेमाल कर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट जैसे फर्जी दस्तावेज बनवाए। रीना ने मामून से निकाह कर लिया और उसे अपनी पत्नी के रूप में पेश किया। मामून देहरादून क्लब में बाउंसर के रूप में काम कर रहा था, जहां से उसे मासिक 25,000 रुपये कमाई हो रही थी।
पुलिस ने दोनों के पास से फर्जी दस्तावेज जब्त किए, जिनमें रीना के पूर्व पति का नाम और फोटो चेंज कर मामून की तस्वीर लगाई गई थी। एसएसपी जनकराज मेघवाल ने बताया, “यह घोटाला जालसाजी का नमूना है। रीना ने न केवल दस्तावेज बनवाए, बल्कि मामून को अपनी पहचान छिपाने में पूरी मदद की। हम उन एजेंटों की तलाश कर रहे हैं जिन्होंने ये फर्जीवाड़ा किया।” ऑपरेशन कालनेमि के तहत अब तक उत्तराखंड में 16 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें से अधिकांश फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी और शादी के बहाने रह रहे थे।
राजनीतिक हलकों में इस गिरफ्तारी को सीमा सुरक्षा पर सवाल उठाने का मौका मिला। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर अवैध घुसपैठ रोकने में नाकामी का आरोप लगाया, जबकि सत्ताधारी भाजपा ने इसे ‘ऑपरेशन कालनेमि’ की सफलता बताया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “फर्जी दस्तावेजों का यह नेटवर्क पूरे देश में फैला है, केंद्र को केंद्रीय एजेंसियां तैनात करनी चाहिए।” पुलिस अब मामून के अन्य संपर्कों की जांच कर रही है, जिसमें बांग्लादेश से और घुसपैठिए आने का खुलासा हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के इस ‘लव जिहाद’ जैसे मामले ने अवैध प्रवासियों के नेटवर्क को उजागर किया है। रीना का पूर्व पति भी जांच के दायरे में आ गया है, क्योंकि उसके नाम का दुरुपयोग हुआ। दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। उत्तराखंड पुलिस ने सभी थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। क्या यह कार्रवाई और बांग्लादेशियों के अवैध नेटवर्क को तोड़ेगी? निगरानी जारी है।
