उत्तराखंड

उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, DIT यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अनुज अग्रवाल को नोटिस

उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, DIT यूनिवर्सिटी के चेयरमैन अनुज अग्रवाल को नोटिस

उत्तराखंड में SC/ST छात्रों की छात्रवृत्ति घोटाले ने नया मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देहरादून की नामी DIT यूनिवर्सिटी पर शिकंजा कसते हुए इसके चेयरमैन अनुज अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। नोटिस में 10 दिनों के अंदर ED के देहरादून कार्यालय में हाजिर होकर जवाब देने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) 2002 के तहत हो रही है, जहां 500 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी का मामला सामने आया है। ED की यह जांच राज्य के समाज कल्याण विभाग और कई निजी संस्थानों की मिलीभगत को उजागर कर सकती है।

घोटाला मुख्य रूप से 2011-12 से 2016-17 के बीच फर्जी दाखिलों के नाम पर SC/ST छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि हड़पने से जुड़ा है। SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) ने पहले ही 17 नामी संस्थानों पर कार्रवाई की सिफारिश की है, जिसमें DIT यूनिवर्सिटी भी शामिल है। ED ने नोटिस में यूनिवर्सिटी से 2010 से 2017 तक के छात्रों, दाखिलों और छात्रवृत्ति वितरण का पूरा ब्यौरा मांगा है। अनुज अग्रवाल को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में पूछताछ के लिए बुलाया गया है, जहां फर्जी नामों से करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने का शक है।

इस घोटाले की जड़ें गहरी हैं। राज्य सरकार ने 2021 में SIT गठित की, जिसने 17 संस्थानों के खिलाफ FIR दर्ज की। अब तक कई कालेज संचालक और विभागीय अधिकारी गिरफ्तार हो चुके हैं। ED की जांच से पता चला कि फर्जी छात्रों के नाम पर राशि जारी कर संस्थान मुनाफा कमा रहे थे, जबकि वास्तविक छात्रों को लाभ नहीं मिला। केंद्र सरकार ने भी इस पर सख्ती बरतते हुए SIT को निर्देश दिए थे। DIT यूनिवर्सिटी, जो इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट में जाना जाता है, अब इस विवाद के केंद्र में है।

राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। विपक्षी दल ED की कार्रवाई को सकारात्मक मान रहे हैं, लेकिन सत्ताधारी BJP पर घोटाले को दबाने का आरोप लगा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा, “यह ED की स्वतंत्र जांच से सच्चाई सामने आएगी, लेकिन सरकार ने पहले ही सालों तक इसे छिपाया।” ED के जोनल डायरेक्टर ने बताया कि जांच में और संस्थान फंस सकते हैं, और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई भी संभव है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा। SC/ST छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना का दुरुपयोग न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक न्याय को ठेस पहुंचाता है। ED की अगली कदम पर सबकी नजरें हैं – क्या अनुज अग्रवाल के बयान से नया खुलासा होगा? फिलहाल, यूनिवर्सिटी ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

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