सोनभद्र खदान हादसा: 7 मजदूरों के शव बरामद, रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त; मलबे में दबे बाकी श्रमिकों की तलाश अधर में
सोनभद्र खदान हादसा: 7 मजदूरों के शव बरामद, रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त; मलबे में दबे बाकी श्रमिकों की तलाश अधर में
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में शनिवार को हुई पत्थर खदान धंसने की घटना ने पूरे इलाके को सन्नाटे में डुबो दिया है। श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की इस खदान में ड्रिलिंग के दौरान अचानक चट्टान गिरने से 15 से अधिक मजदूर मलबे में दब गए थे। 48 घंटे से अधिक चले तीव्र रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सोमवार को सात शव बरामद हो चुके हैं, और एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की संयुक्त टीम ने अभियान समाप्त घोषित कर दिया। मलबे में दबे बाकी मजदूरों की तलाश अब स्थानीय प्रशासन पर छोड़ दी गई है, जिससे परिवारों में हाहाकार मच गया है।
हादसा शनिवार दोपहर करीब 4:30 बजे हुआ, जब खदान में ब्लास्टिंग के लिए होल ड्रिलिंग का कार्य चल रहा था। अचानक 100 फीट ऊंची चट्टान धंस गई, जिससे भारी मलबा गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त खदान में 15-18 मजदूर काम कर रहे थे। कुछ ने भागकर जान बचाई, लेकिन बहुमंडलीय मजदूर मलबे के नीचे दब गए। मृतकों में दो सगे भाई—मधुसूदन सिंह और दिलीप केसरी—शामिल हैं। एक पिता ने बताया कि उनके तीन बेटों में से दो मलबे में दबे हैं, जबकि सबसे छोटा नीचे काम कर रहा था और बच गया। रेस्क्यू में भारी पत्थरों, पानी भराव और खराब रास्ते के कारण देरी हुई। एनडीआरएफ की टीम रविवार को पहुंची और मंगलवार तक सात क्षत-विक्षत शव निकाले।
सोमवार शाम को रेस्क्यू बंद करने का फैसला लिया गया, क्योंकि आगे खोज संभव नहीं बनी। सोनभद्र एसपी अभिषेक वर्मा ने कहा, “टीमों ने पूरी कोशिश की, लेकिन सुरक्षा कारणों से अभियान रोक दिया। मलबा हटाने का काम जारी रहेगा।” वाराणसी जोन एडीजी पीयूष मोर्डिया ने बताया कि मलबे में 8-10 मजदूर दबे हो सकते हैं। जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी को तत्काल राहत के निर्देश दिए। स्थानीय विधायक संजीव कुमार गोंड ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि खदान में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ। बिना हेलमेट और सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा था, और हेवी ब्लास्टिंग के बाद भी सतर्कता बरती नहीं गई। पुलिस ने खदान मालिक सहित तीन लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (लापरवाही से मौत) और 337 (चोट पहुंचाने) के तहत एफआईआर दर्ज की है। मालिक फरार बताया जा रहा है। मजदूर यूनियन ने इसे ‘खनन माफिया की लापरवाही’ करार देते हुए सीएम से उच्च स्तरीय जांच की मांग की। विपक्षी दलों ने सरकार पर उद्योगों की अनदेखी का आरोप लगाया।
यह हादसा सोनभद्र के खनन क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, जहां पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है—एक विधवा ने कहा, “मेरा इकलौता सहारा चला गया।” प्रशासन ने काउंसलिंग टीम तैनात की है। कुल मिलाकर, सात जिंदगियां खो चुकी इस घटना ने श्रमिक सुरक्षा कानूनों की पोल खोल दी है।
