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केंद्र ने जारी किए DPDP रूल्स 2025 – अब आपके डेटा पर आपका कंट्रोल, 12-18 महीनों में लागू

केंद्र ने जारी किए DPDP रूल्स 2025 – अब आपके डेटा पर आपका कंट्रोल, 12-18 महीनों में लागू

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लंबे इंतजार के बाद डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) रूल्स 2025 को अधिसूचित कर दिया। ये नियम अगले 12 से 18 महीनों में चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे, जिससे भारत में ऑनलाइन प्राइवेसी को मजबूत आधार मिलेगा। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को अपने निजी डेटा पर पूर्ण नियंत्रण देना और डेटा के दुरुपयोग को रोकना है।

क्या हैं नए नियम? मुख्य बिंदु

डेटा प्रिंसिपल का अधिकार: हर नागरिक को यह जानने का हक होगा कि उसका डेटा कहां, कैसे और क्यों इस्तेमाल हो रहा है।

कंसेंट मैनेजमेंट: कोई भी ऐप या वेबसाइट डेटा लेने से पहले स्पष्ट, सरल भाषा में अनुमति लेगी।

डेटा फिडुशरी की जिम्मेदारी: Google, Meta, Amazon जैसी कंपनियों को डेटा ब्रीच होने पर 72 घंटे में सूचना देनी होगी।

बच्चों का डेटा: 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य।

डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड: एक स्वतंत्र बोर्ड गठित होगा, जो शिकायतों का निपटारा करेगा और जुर्माना लगा सकेगा।

किन पर लागू होंगे?

सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म – सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थ ऐप्स।

विदेशी कंपनियां भी, जो भारतीय यूजर्स का डेटा प्रोसेस करती हैं।

चरणबद्ध लागूकरण:

पहला चरण (6 महीने): बड़े प्लेटफॉर्म्स (1 करोड़+ यूजर्स)।

दूसरा चरण (12 महीने): मध्यम कंपनियां।

तीसरा चरण (18 महीने): स्टार्टअप्स और छोटी फर्म्स।

सरकार का दावा:

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,

“ये नियम GDPR की तर्ज पर हैं, लेकिन भारत की जरूरतों के अनुकूल। नागरिक अब डेटा का मालिक बनेगा, न कि कोई कंपनी।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डेटा ब्रीच, फेक न्यूज, फ्रॉड में कमी आएगी। हालांकि, कुछ उद्योगों ने अनुपालन लागत बढ़ने की चिंता जताई है।

क्या आप तैयार हैं अपने डेटा की रक्षा के लिए? कमेंट करें।

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