नेपाल ने बदला अपनी करेंसी छपवाने का ठिकाना: अब चीन में छपते हैं नेपाली नोट, भारत से तनाव बढ़ा
नेपाल ने बदला अपनी करेंसी छपवाने का ठिकाना: अब चीन में छपते हैं नेपाली नोट, भारत से तनाव बढ़ा
काठमांडू: नेपाल ने अपनी करेंसी नोट छपवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। लंबे समय से भारत में छापे जा रहे नेपाली रुपए के नोट अब चीन में प्रिंट हो रहे हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने हाल ही में 100 रुपए के नए नोट डिजाइन और प्रिंटिंग का ठेका चीन की सरकारी कंपनी चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन (CBPM) को सौंपा है। यह फैसला मई 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल ‘प्रचंडा’ की कैबिनेट ने लिया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय टेंडर प्रक्रिया के जरिए चयन हुआ। इस बदलाव ने भारत-नेपाल संबंधों में नई खटास पैदा कर दी है, क्योंकि नए नोटों पर नेपाल का विवादित मानचित्र छपा है, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिंपीयाधुरा जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
पहले नेपाली करेंसी के नोट महाराष्ट्र के नासिक स्थित सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) में छापे जाते थे। यह व्यवस्था दशकों पुरानी थी, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक बनी हुई थी। विकिपीडिया और अन्य स्रोतों के अनुसार, 1945 से लेकर 2007 तक के कई नोट सीरीज नासिक में ही प्रिंट हुए। लेकिन 2024 में NRB ने 300 मिलियन 100 रुपए के नोट प्रिंट करने का अनुबंध CBPM को $8.99 मिलियन (करीब 75 करोड़ रुपये) में दिया। यह नोट नए राजनीतिक मानचित्र के साथ आ रहे हैं, जो 2020 में नेपाल के संविधान संशोधन के बाद अपडेट किया गया था। नेपाल के संचार मंत्री रेखा शर्मा ने ANI को बताया, “सरकार ने NRB को पुराने मानचित्र को अपडेटेड वर्जन से बदलने की मंजूरी दी है। पूरी प्रक्रिया 6 से 12 महीने में पूरी हो जाएगी।”
यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भी है। भारत ने नेपाल के मानचित्र को ‘कृत्रिम विस्तार’ और ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “ऐसे कदम से जमीन की हकीकत नहीं बदलेगी।” कालापानी क्षेत्र, जो भारत के उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में आता है, काली नदी के स्रोत को लेकर विवादित है। नेपाल का दावा है कि यह 1816 के सुगौली संधि के तहत उनका है, जबकि भारत 35 वर्ग किमी क्षेत्र को अपना मानता है। नए नोटों पर इन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाने से सीमा तनाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को ठेका देना नेपाल की ‘चीन के साथ करीबी’ नीति का हिस्सा है, जो भारत को असहज कर रहा है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता दिली राम पोखरेल ने नेपाखबर.कॉम को बताया कि प्रक्रिया चल रही है, और नोट जल्द ही बाजार में आएंगे। यह बदलाव नेपाल की आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक माना जा रहा है, लेकिन पड़ोसी भारत के साथ संबंधों पर असर डाल सकता है। दोनों देशों के बीच 1850 किमी लंबी खुली सीमा है, और करेंसी का यह विवाद व्यापार व कूटनीति को प्रभावित कर सकता है। क्या यह तनाव सुलझेगा? आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया तय करेगी।
