ED का बड़ा एक्शन… जेपी इंफ्राटेक के एमडी मनोज गौर मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार
ED का बड़ा एक्शन… जेपी इंफ्राटेक के एमडी मनोज गौर मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को रियल एस्टेट दिग्गज जेपी ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) मनोज गौर को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी घर खरीददारों के साथ धोखाधड़ी और उनके पैसे के कथित गबन से जुड़ी जांच का हिस्सा है, जिसमें करीब 12,000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। ED के अधिकारियों ने पुष्टि की कि गौर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ लंबे समय से चल रही जांच को नई दिशा देगी, जहां कंपनी पर घर खरीदारों की जमीन बुकिंग के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप है।
जेपी इंफ्राटेक, जो यमुना एक्सप्रेसवे पर नोएडा के विंध्याचल और शारदा जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए जानी जाती है, 2017 से कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दायरे में है। IDBI बैंक की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने कंपनी के 526 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट पर NCLT, इलाहाबाद में याचिका दायर की थी। ED की जांच में पता चला कि जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड, मनोज गौर के नेतृत्व में, घर खरीदारों से लिए गए फंड्स को डायवर्ट और सिफन कर लिया गया। मई 2025 में ED ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में 15 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था, जहां जेपी इंफ्राटेक, जेपी एसोसिएट्स और उनके सहयोगी गौरसॉन्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड व गुलशन होम्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तरों पर छापे मारे गए। इन छापों से दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय ट्रांजेक्शन के सबूत बरामद हुए, जो मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को मजबूत करते हैं।
घर खरीदारों का दर्द पुराना है। जेपी इंफ्राटेक ने 20,000 से अधिक फ्लैट्स बुक कराए, लेकिन प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण हजारों खरीदार परेशान हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में कंपनी को 1,600 एकड़ जमीन बेचने की अनुमति दी थी, लेकिन ED का मानना है कि ये फंड्स भी पारदर्शी तरीके से इस्तेमाल नहीं हुए। गिरफ्तारी के बाद मनोज गौर को ED के हिरासत में रखा गया है, और पूछताछ जारी है। जेपी ग्रुप ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, जांच में अन्य डायरेक्टर्स और बिजनेस पार्टनर्स भी निशाने पर हैं।
यह मामला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की मांग को तेज कर रहा है। घर खरीदार संगठनों ने ED की सराहना की है, लेकिन मांग की है कि फंसे पैसे जल्द रिफंड हों। मुंबई बेस्ड सुरक्ष ग्रुप ने 2021 में जेपी इंफ्रा को खरीदा था, लेकिन पुराने केस अब भी लटके हैं। क्या यह गिरफ्तारी घोटाले के अन्य राज खोलेगी? ED की अगली चाल पर सबकी नजरें टिकी हैं।
