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दिल्ली धमाके पर बड़ा खुलासा: 11 साल में 5 बार बिक चुकी है ब्लास्ट वाली i20 कार, खरीदारों की लिस्ट ने खोली साजिश की परतें

दिल्ली धमाके पर बड़ा खुलासा: 11 साल में 5 बार बिक चुकी है ब्लास्ट वाली i20 कार, खरीदारों की लिस्ट ने खोली साजिश की परतें

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुए विस्फोटक धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-1 के पास सुभाष मार्ग पर शाम 6:52 बजे हुंडई i20 कार में हुए इस ब्लास्ट में 13 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जबकि 20 से अधिक घायल हैं। दिल्ली पुलिस, एनआईए और स्पेशल सेल की संयुक्त जांच में अब एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जिस i20 कार का इस्तेमाल विस्फोटकों को लाने के लिए किया गया, वह अपने 11 साल के जीवनकाल में न सिर्फ 5 बार हाथ बदली, बल्कि हर बार खरीद-फरोख्त में संदिग्ध कनेक्शन उभर रहे हैं। यह कार आतंकी साजिश का एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कार मूल रूप से 2014 में हरियाणा के गुरुग्राम में रजिस्टर्ड हुई थी। डीएल नंबर HR-29-XX-XXXX वाली इस i20 को पहली बार स्थानीय व्यवसायी मोहम्मद सलमान ने खरीदा था। सलमान ने इसे मात्र डेढ़ साल बाद, यानी 2016 में ओखला निवासी देवेंद्र सिंह को 3.5 लाख रुपये में बेच दिया। देवेंद्र, एक ऑटो पार्ट्स डीलर, ने कार को 2018 तक रखा, लेकिन उसके बाद इसे फरीदाबाद के यूज्ड कार डीलर नदीम अहमद को ट्रांसफर कर दिया। नदीम ने 2019 में कार को रॉयल कार जोन नामक डीलरशिप को सौंपा, जहां से यह 2020 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रहने वाले तारिक अहमद के हाथ लगी। तारिक, जो स्थानीय ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा है, ने कार को मात्र 6 महीने बाद मार्च 2021 में डॉ. उमर नबी को बेच दिया। उमर नबी, फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े एक संदिग्ध डॉक्टर, ने कार का आरसी ट्रांसफर नहीं कराया और इसी वाहन को ब्लास्ट से ठीक 4 दिन पहले ओएलएक्स के जरिए हासिल किया।

खरीदारों की इस लिस्ट से साफ है कि कार की हर बिक्री में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। सलमान और देवेंद्र से पूछताछ में पता चला कि वे बेखबर थे, लेकिन तारिक और उमर के कनेक्शन पुलवामा हमले से जुड़े आतंकी नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज में उमर को काले मास्क में कार ड्राइव करते देखा गया, जो फरीदाबाद से दिल्ली पहुंचने के रास्ते में कई टोल प्लाजा पार करता है। 29 अक्टूबर को कार का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाते समय तीन संदिग्ध व्यक्ति नजर आए।

एनआईए को शक है कि यह कार 2 साल से विस्फोटकों की तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रही थी। फरीदाबाद के सेक्टर-37 से खरीदी गई यह i20 ब्लास्ट से पहले दिल्ली के ईस्ट, नॉर्थ और सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट घूम चुकी थी। उमर फरार है, लेकिन स्पेशल सेल ने सलमान, नदीम और तारिक को हिरासत में ले लिया है। दिल्ली पुलिस ने पूरे एनसीआर में अलर्ट जारी कर दिया है। यह खुलासा न सिर्फ साजिश की गहराई बताता है, बल्कि वाहनों की ट्रैकिंग सिस्टम में खामियों को भी उजागर करता है। सरकार ने मामले को नेशनल सिक्योरिटी के दायरे में डाल दिया है, और जांच तेज हो गई है। क्या यह पुलवामा का नया चैप्टर है? आने वाले दिनों में और राज खुलने की उम्मीद है।

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